हमारी ,तुम्हारी आत्मा एक है /हम दोनों में कौई फर्क नहीं है /फिर हमारे अलग होने का कोई मतलब ही नहीं है/मैं स्वर्ग में आकर तुम्हें
प्राप्त कर लूँगा /ईश्वर के सानिध्य में हम एक साथ रहेंगे / '' तुषार जी'' का विश्वास अपनी प्रियतमा के प्रति चिरंतन है वो दिवंगत प्रिया की पदचापें
सुनते हैं ,वो नियति की क्रूरता से डरते नहीं ,सहमते नहीं /वो लार्ड ब्राउनिंग से भी अलग अपने प्रेम संबंधों में एक रागात्मकता देखते हैं/
..[.समीक्षा ]
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