रविवार, 28 अगस्त 2011

मेरे सपनों का ये भारत कुछ तो अन्ना में दीखा है,
इतिहास बदलता दीखा है इन्सान उभरता दीखा है ,
आन्दोलन की उपलब्धि कम नहीं थी ,नौकरशाही , लोकशाही ,न्याय व्यवस्था का लचीलापन ,आम आदमी के प्रति बेरुखी और भ्रष्टाचार का बोलबाला ,
सबके ऊपर करारा प्रहार था /सरकार की नींद खुली /जनता का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभूतपूर्व था /
..............''.तुषार'' देवेन्द्र चौधरी ,वैशाली ,गाजियाबाद

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें