शुक्रवार, 15 अगस्त 2014
निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत बिखरी है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है , .
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //
,
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
भुला दो सब जमाने को ,इशारों में दफन कर दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //
बहुत ठंडी हवाएँ हैं ,अजानी -सी दिशाएं हैं
सिहरती-सी किनारों पर ,खड़ी यह वेदनाएं हैं ,
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)