शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

सुबह खिली है बिना तुम्हारे ,शाम दली है बिना तुम्हारे ,
आँखों से रिस -रिस कर देखो , प्रीत घुली है बिना तुम्हारे /

रविवार, 9 अक्टूबर 2011

राजीव गाँधी के मंत्री मंडल में बी. पी. सिंह बित्त मंत्री ,उसके बाद रक्षा मंत्री बने /उन्हें विरोधी दलों की ओर से राजीव के खिलाफ वगावत करने का लालच दिया जा रहा था /जब वो रक्षा मंत्री थे १४०० करोड़ का बोफोर्स गन सौदा हुआ था /रक्षा सौदे दुनिया में कहीं भी बिना दलाली के नहीं होते /लगभग ६० करोड़ देने पड़े /मगर राजीव पर अभियोग लगवा दिया कि ये दलाली वो खा गए /विपक्षी दल जो चाहते थे राजा ने राजीव के साथ विश्वासघात करके उनकी डूबी हुई साख को जीवित कर दिया /नेहरु वंश पर देश के साथ दलाली का यह अभियोग मुझे तीर की तरह लगा / राजा ने राजीव की पीठ में छुरा भोंक दिया/
'' प्रेस विज्ञप्ति ''
आज दिनांक ९-१०-२०११ को साहित्यिक संस्था ''काव्य -शिल्पी '' के तत्वावधान में , संयोजक श्री देवेन्द्र चौधरी '' तुषार '' के निवास स्थान वैशाली ,गाजियाबाद पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया / अनेक जाने -माने कवियों ने गोष्ठी में भाग लेकर रस विभोर कर दिया /श्रोता झूम उठे /गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार महेश सक्सेना ने की तथा संचालन डा ० जय शंकर शुक्ल ने किया / गोष्ठी में भाग लेने वाले कवियों में मोहन द्विवेदी ,संजय शुक्ल ,नीतू तोमर ,अनित्य नारायण मिश्र ,रुस्तम सिंह लोधी प्रमुख रहे / मोहन द्विवेदी हास्य व्यंग के राष्ट्रीय स्तर के कवि हैं /उनकी रचनाओं में पाकिट [जेब] से सम्बंधित रचना आदमी की आर्थिक मनोदशा को इतनी गहराई से उतारती रही जिसने एक आम आदमी की आर्थिक हालत और सोच को जीवंत कर दिया / 'तुषार' का गीत ''मेरी आँखों से मत पूछो ,मेरी दुनिया कैसी है ,अभी तुम्हारी आँखों से ये बाहर ही कब निकली है '', मन को छूकर निकल गया / सभी कवियों ने गीतों , गजलों दोहों से संगोष्ठी को एक नयी ऊँचाई दी / कार्यक्रम इतना सफल रहा जिसे भूल पाना कठिन है /

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

आपरेशन ब्लू स्टार से लेकर इंदिरा की शहादत तक और उसके बाद की हिंसक घटनायें अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण थीं /राजीव गाँधी को इंदिरा की शहादत के कारण अपार सहानुभूति मिली / पूरा देश उनका गम भुलाने के लिए राजीव को सीने से चिपकाना चाहता था /३१ अक्तूबर को प्रधान मंत्री बन गये /चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला /लोकसभा में ४११/५४२ सीट मिलीं /चुनाव प्रचार में वो चंदौसी आये थे / बी.पी. सिंह साथ थे /लगभग एक लाख लोग या चंदौसी की आधी आबादी उन्हें सुनने -देखने के लिए पहूँची /
मैं भी गया था /बी.पी.सिंह ने राजीव का परिचय प्रधान मंत्री योग्य राजकुमार के रूप में कराया /राजीव ने बहुत . ही नपे तुले शब्दों में अपना भाषण दिया /वो इतने मनमोहक लग रहे थे जैसे राम का अवतार प्रत्यक्ष में सामने हो /जनता उन्हें देखती ही रह गयी /
राजीव गाँधी ने आते ही लाइसेंस परमिट राज ख़त्म कर दिया /टेली कम्यूनिकेशन को आधुनिक बनाया उसका बिस्तार किया /साइंस - टेकनोलोजी पर जोर दिया /इक्कीसवीं सदी के भारत की नींव रखी / वो एक भविष्य द्रष्टा थे /प्रधान मंत्री के पद पर उनकी गरिमा के सामने ,पूरी दुनिया के राष्ट्र अध्यक्ष फीके लगते थे /

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

१९८० तक आते -आते लोग राष्ट्रीय -एकता का मतलब समझने लगे थे / लोगों के मन में छोटे -मोटे डर तो थे ,कहीं जातिबाद पर , बहुसंख्यक ,अल्पसंख्यक पर ,क्षेत्रीय आस्तित्व पर चिंगारी न सुलग उठे मगर सच तो यह था पूरा देश राष्ट्र की मुख्य धारा में समां चुका था /डर होते हुए भी हिंदुस्तान हम सब का प्यारा वतन बन चुका था / हम सब भारत वासी इस मुल्क को अपना मुल्क समझने लगे थे / ऐसे में खालिस्तान का आन्दोलन कुछ सिख मिलिटेंट्स ने चलाकर पूरे देश को सकते में डाल दिया / सरकार की रातों की नींद उड़ गई /काफी प्रयास किये गए शांति से समस्या का हल निकल आये /मगर जितनी दवा की मर्ज उतना ही बदता गया / आखिर १९८४ में ब्लू -स्टार -आप्रेशन का फैसला लिया गया /बहुत
साबधानी से कार्रवाई करनी थी ,जान माल का कोई नुकसान न हो / मगर काउंटर विरोध के कारण नुकसान हुआ / आन्दोलन लगभग समाप्त हो गया /प्रतिक्रिया में ३१ अक्टूबर१९८४ के दिन इंदिरा गाँधी के अंगरक्क्षों ने उन्हें गोलियों से भून डाला /

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

जनवरी १९८० में जनता दल की विफलता तथा आपसी फूट के कारण चुनाव हुए /इंदिरा गाँधी की एक बार फिर धमाकेदार बापसी हुई /जनतादल १७२ सीट से लुदककरकुल ३१ सीट पर आ गया /केंद्र में अब इंदिरा कांग्रेस या कांग्रेस आई की मजबूत सरकार सिंहासन पर थी/ मगर 'खालिस्तान आन्दोलन' ने इंदिरा को चैन से बैठने न दिया /भारत के लोगों को सिक्खों से बेहद प्यार था ,उनकी बहादुरी की कद्र की जाती थी / मगर यह कैसा अप्प्रयाशित आन्दोलन छिड़ा सभी सकते में थे /सिख पूरे भारत में फैले हुए थे /खुश थे /मगर पंजाब में नाखुश /
मोरारजी जितने योग्य अर्थशास्त्री थे ,विद्वान तथा सरल इन्सान थे ,लोकप्रिय भी थे उतने ही कमजोर प्रधान मंत्री साबित हुए /जगजीवन राम डिप्टी पी. एम ,अटलविहारी बाजपेयी विदेश मंत्री .....सब प्रधानमंत्री की रेस में चोधरी चरणसिंह आदि के बीच मोरारजी भाई कहाँ खड़े थे उन्हें खुद पता नहीं था /निराश होकर जुलाई १९७९ में इस्तीफ़ा दे दिया / उनकी जगह चरणसिंह को छह महीने के लिए काम चलाऊ पी.एम .बनाया गया /संयुक्त जनता दल ताश के पत्तों की तरह बिखर गया /उधर इंदिरा गाँधी की बदती लोकप्रियता से भी सिंहासन हिलने लगा/
आपातकाल के बाद जनवरी १९७७ में चुनाव हुए /जे. पी. आन्दोलन जो इंदिरा हटाओ ,सम्पूर्ण क्रांति या सत्ता पर नेहरु वंश का एकाधिकार हटाने का आन्दोलन था कुछ हद तक सफल हुआ / जिसके लिए हिंदुस्तान का ,पूरा विपक्ष ऐड़ी से चोटी का जोर लगाकर कूदा था /इंदिरा गाँधी सड़क पर थीं , बिपक्ष सिंहासन पर /मोरारजी भाई संयुक्त जनता दल के प्रधानमंत्री बने /इंदिरा गाँधी को कदम -कदम पर घसीटा गया ,जेल भेजा गया /जनता की सहानुभूति बापस उनके प्रति गहराने लगी /जनता दल बिखरने लगा / उनका हर नेता प्रधानमंत्री की रेस में था /

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

लेकिन आपातकाल में इंदिरा तथा विपक्ष के बीच जो घमासान चल रहा था देखने लायक था ,सोचने लायक था /एक लाख चालीस हजार लोग आन्दोलन में जेल गए / विद्रोह की लपटें इक्कीस महीने तक ,जब तक आपातकाल लागू रहा सुलगतीं रहीं /संजय गाँधी का हस्तक्षेप विवादास्पद रहा / इंदिरा की छवि को उससे कितना नुकसान पहुंचा ,बताना मुश्किल है / इंदिरा के बीस सूत्री कार्यक्रम को कितनी सफलता मिली सरकार को पता होगा /आखिर आपातकाल बापस लिया गया /चुनाव घोषित हो गए/
इंदिरा गाँधी जिन कार्यक्रमों को लेकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहीं थीं ,विपक्ष के आन्दोलन से भारी नुकसान हो सकता था /युद्ध के बाद देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था /वो कृषि और औद्योगिक विकास के लिए बीससूत्री योजना लेकर आयीं / तेल संकट बढ गया था / यदि आपातकाल न लगाया जाता तो संकट संभाले नहीं संभलता / बिपक्ष सत्ता परिवर्तन की जिद में देशव्यापी विद्रोह तथा सरकारी मशीनरी को कामकाज ठप्प करने के लिए उकसा रहा था /

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

१९७५ से इंदिरा गाँधी के लोम हर्षक दिन शुरू हो गए / इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उनका चुनाव अवैध ठहरा दिया /राजनारायण की रिट स्वीकार हो गई /विपक्ष को उनपर हमले तेज करने का अचूक अवसर मिल गया /जयप्रकाश नारायण का सहयोग उनकी छवि फायदे का सौदा बन गया / जयप्रकाश जी ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया /इंदिरा को आपातकाल लगाने का मौका मिल गया /जयप्रकाश , अटल बिहारी ,अडवाणी ,चरणसिंह जैसे नेता जेल में भर दिए गए /मेरी द्रष्टि में दोनों पक्ष अपनी जगह ठीक थे ,जो कुछ हुआ देश के भले के लिए हुआ /.....
बंगला देश की आजादी के परिणाम स्वरुप -९०००० पाकिस्तानी युद्ध बंदी भारत की जेलों में कैद हो गए / इंदिरा गाँधी तथा जुल्फकार अली भुट्टो के बीच जुलाई १९७२ में शिमला समझौता हुआ /पाकिस्तान ने बंगला देश को राजनीतिक मान्यता दी /कैदी रिहा किये गए / भविष्य में उप महाद्वीप में शांति स्थापित करने के लिए कई उपायों को लागू करने की बचन बध्यता प्रगट की गयी/इस समय इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता शीर्ष पर थी /अटल बिहारी बाजपेयी ने उन्हें दुर्गा का अवतार बताया /

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

१९७१ तक तथा इंदिरा गाँधी काफी अनुभव चुनौतियों से गुजर चुकीं थीं /बंगलादेश अशांत था / पश्चिमी पाकिस्तान ,पूर्वी पाकिस्तान पर
जुल्म बरपा रहा था / बंगला देश, शेख मुजीबुर रहमान की अगुआई में आजादी की जंग के लिए तैयार बैठा था /लाखों बंगला देशी भारत के शरणार्थी
शिविरों में पनाह ले चुके थे /मुक्ति बाहिनी की भूमिका में भारत का योगदान इंदिरा गाँधी का ऐतिहासिक कदम था जिसने पाकिस्तान का बंटवारा कर दिया /.....i

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

इंदिरा गाँधी और ,मोरारजी देसाई के बीच भारी टकराव था /कांग्रेस का एक धड़ा मोरारजी के पक्ष में था / मोरारजी बित्त्मंत्री रह चुके थे /योग्य समझे जाते थे /
इंदिरा जी गूंगी गुडिया के नाम से जानी जातीं थीं / यह तय करना कोई मुश्किल नहीं था कि किसे महत्त्व दिया जाए / दोनों के बीच जीत इंदिरा की हुई /
इदिरा ने बेंकों का एक झटके में ही राष्ट्रीयकरण कर डाला / देश ने उनका यह कदम खुले दिल से स्वीकार किया /मोरारजी की छवि धूमिल होने लगी /......
शास्त्री जी पर देश कुछ ज्यादा ही विश्वास कर बैठा /ऐसी कोई बात नहीं थी /उनके जाने के बाद इंदिरा को लाया गया /लाने के लिए कुछ बचा ही न था / एक रिस्क
के रूप में उन्हें पेश कर दिया गया /उनका पहला भाषण बरेली में मैंने सुना /उन्हें कुछ बोलना नहीं आता था / मैं हैरान था क्या यह नेहरु की बेटी हैं / पंद्रह मिनट में
यह पता चल गया वो कुछ भी नहीं जानती हैं उन्हें जबरदस्ती प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जा रहा है /.....
नेहरु के जीवनकाल में ही यह चर्चा शुरू हो गयी थी --नेहरु के बाद कौन ..?आखिर भारत कौन संभालेगा ..? शास्त्री जी ,पाकिस्तान से युद्ध कर के चले गए या
पाकिस्तान ,नेहरु के बाद इस हमले को एक अवसर समझ कर भारत से युद्ध कर बैठा /युद्ध बहुत मौके का हुआ /चीन के साथ भी युद्ध बहुत मौके का था / इन दोनों
युद्धों ने एशियाई महाद्वीप में एक शांतिपूर्ण भविष्य की नींव रख दी /तीनों पड़ौसी मुल्कों को कई मानों में आगाह कर दिया कि युद्ध विध्वंस के सिवा कुछ नहीं कर सकता /....