geeton ke baadal- [1]
शुक्रवार, 15 अगस्त 2014
निगाहों ही निगाहों में ,तुम्हारा तैरना देखा ,
सुबह की ओस को देखा , नदी की धार को देखा ,
जहाँ तक रेत बिखरी है ,छलकने की तमन्ना है /
हमारे प्यार के रस्ते ,हजारों मील जाते है , .
कभी तुम पास आते हो , कभी हम पास आते हैं /
जहाँ तक धूप खिलती है ,बिखरने की तमन्ना है //
,
हमारा हाल मत पूछो ,जरा सीने पे सर रख दो ,
भुला दो सब जमाने को ,इशारों में दफन कर दो ,
धुंए की बेशुमारी तक ,उतरने की तमन्ना है //
बहुत ठंडी हवाएँ हैं ,अजानी -सी दिशाएं हैं
सिहरती-सी किनारों पर ,खड़ी यह वेदनाएं हैं ,
तुम्हारी बेकरारी से , गुजरने की तमन्ना है /
मंगलवार, 3 जनवरी 2012
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011
दूरदर्शन -----जीवन रुपी सागर में उल्लास और उदासी से जुड़ी अनेक घटनायें लहरों की तरह उमड़ती तो हैं
मगर मनपर उनकी छाप पत्थर पर पड़ी लकीरों की तरह होती है ऐसे ही गीतों का संग्रह है --गीतों के बादल /
हिंदुस्तान ----गीत गुनगुनाने की जरुरत हमारे रोजमर्रा के जीवन को आनंद की अनुभूति से भर देती है /
संगीत और शब्दों के mithas के प्रति चाहत एक प्राकृतिक क्रिया है ''गीतों के बादल ''के गीत रूमानियत
और निजी अंतर्द्वंदों के मिले-जुले भाव प्रस्तुत करते हैं /शुरू से अंत तक इन गीतों के भाव एक-एक पग आगे
बदाते हुए चलते हैं / गीतकार की पीड़ायें इन गीतों में पूरी तरह सजीव होकर उतरी हैं /
मगर मनपर उनकी छाप पत्थर पर पड़ी लकीरों की तरह होती है ऐसे ही गीतों का संग्रह है --गीतों के बादल /
हिंदुस्तान ----गीत गुनगुनाने की जरुरत हमारे रोजमर्रा के जीवन को आनंद की अनुभूति से भर देती है /
संगीत और शब्दों के mithas के प्रति चाहत एक प्राकृतिक क्रिया है ''गीतों के बादल ''के गीत रूमानियत
और निजी अंतर्द्वंदों के मिले-जुले भाव प्रस्तुत करते हैं /शुरू से अंत तक इन गीतों के भाव एक-एक पग आगे
बदाते हुए चलते हैं / गीतकार की पीड़ायें इन गीतों में पूरी तरह सजीव होकर उतरी हैं /
शनिवार, 3 दिसंबर 2011
संजय कुमार --आप के हाथो में जादू है , आप की कृति अतुल्य है , देवेन्द्र जी माँ सस्वती आप को और भी शब्दों का अमृत बरसाने के लिए आशीष दे ...
चेतन रामकिशन-
चेतन रामकिशन ---हमने तो आज तक महोदय की जितनी भी रचना पढ़ी हैं, सबने मन को भावों से, विधाओं से और सत्यता से जोड़ा है!
मुझ नवोदित ने उनके हर एक रचना से ज्ञान प्राप्त किया है! न मैं इन्हें शायर मात्र की संज्ञा दूंगा, न ही कवि की! मैं तो इन्हें पूर्ण साहित्यकार कहता हूँ, जो हर विधा में पारंगत हैं! नमन तुषार जी! "
चेतन रामकिशन -- आप की रचना बहुत ही प्यारी होती है , ह्रदय से आभार --
चेतन रामकिशन- आपकी ओजस्वी रचन्नाओं पर कुछ कमेन्ट करने के लिए शब्द ही नहीं मिल पते! बहुत अनमोल रचना!
Manorma Mishra -- unluckly devendar ji , jab aapki pustak mili, main , bahut beemar hu. hospital me hu.bas lete -lete abhi bhumika hi padhi hai . man sochane par vivash ho gaya ki kabhi -kabhi insaan ke saath kuchh na kuchh aisa ghatata rahata hai jisaki use ummeed nahi hoti..sab kuchh aakankhaoon se pare hota hai... jaise kuchh aapke saath hua..... bahut prerna mili mujhe aapse ki insaan ko himmat nahi khona chahiye .
Manorma Mishra --main to dekhakar dang rah jati hun ki .jindagi ke har ahassas ko itni khoobsoorti se shabdo me kaise pirote hain aap...
Navin C. Chaturvedi --आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' बार बार पढ़ रहा हूँ, वाह क्या गीत हैं, आनंद आ रहा है| एक तो मुंबई में वर्षा और उस पर आप के गीतों की रिमझिम,
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Navin C. Chaturvedi---तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-
:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देती है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|
:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
Anand Pandey ----wonderful! Hum to samjhe the ki ashkon ki kishten chuk gayeen-- Par raat ek tasweer ne phir se taqaja kar diya.
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन /.......मैं अभी भी ’गीतों के बादल’ को फाहा-फाहा जी रहा हूँ. आपकी सोच के लालित्य और आपकी लेखिनी के संगीतमय प्रवाह में खूब डूब-उतरा रहा हूँ. इस पर विस्तार से साझा करूँगा. अभी कुछ समय और-और बहने दें./
Toshlendra Pandya-- sir, whether I think your the person who coming on earth to give colours in people blank life.....we need your regular colourful coments to enjoy the beautiful world of God.....
N.p. Jadaun Singh--- ,aapke dwara , AAPKE KAR KAMLON DWARA RACHIT PUSTAK "GEETON KE BAADAL " MUJHE MILI , AAPKI RACHNAON ME EK- EK SHABD SE SHINGAR RAS TAPAKTA HAI, AAP HUM JAISE KARORON PAATHKO KA MAN MOHTE RAHEN. AAPKO BAHUT- BAHUT BADHAIYA ISS SANSKARAN KE LIYE AUR DHANYAVAAD.
Pawan Kumar --Thank you So Much Sir ji..!! Thank you sooo Very much....!! For sending me Your so Beautiful Creation...!! I Love those songs in that book "GEETON kE BAADAL" very much..!!
Subhash Sharma--- Aapke ye--' geeton ke badal ' hi nahi hain-- inmai samudar se bhi jyada gahrai hai.- Aakhen bahut rokne par bhi- gili ho jati hain. Aap ke liye hamare pas shabd nahi hain.-- Aapka Pathak.
Neeraj Tripathi--- ये तुषार के 'गीतों के बादल' हैं,
इनसे पार और कहाँ जाओगे,
इस जीवन की अथाह गर्मी में'
सारी नमी यही पाओगे
Anurag Jagdhari---------
असल ज़िन्दगी में ना जाने कितने झंझावातों से पार हुए हैं आप!सोचता हूँ ना जाने कैसे आप इन सब हालातों में भी कविता करते रहे.खैर दर्द भी कविता को जन्म देता है.अभी कुल जमा 14 कवितायेँ पढ़ी हैं.आप इन हालातों में भी कैसे इतना सृजन कर पाए,आश्चर्य होता है.शेष फिर ..........
Sarita Upadhyaya --तुषार जी ,नमस्कार |
मैं बहुत दिनों से सोच रही थी की आपसे कहूँ न जाने क्यों साहस न जुटा पाई ,आज कह ही रही हूँ मैं भी आपकी पुस्तक ''गीतों के बादल ''को पढ़ने की बड़ी इच्छुक हूँ पार समस्या ये है की वर्तमान में, मैं इस्राएल में हूँ सो नहीं जानती आपसे कैसे कहूँ पुस्तक प्राप्त करने को ;क्या ये पुस्तक नेट प़र उपलब्ध है ---कृपया बताएं |
R.k. Gupta ---तुषार जी --आपका हार्दिक अभिनन्दन....इतनी खूबसूरत कविता बहुत दिनों बाद पडी है.....जयशंकर प्रसाद जी की याद आ गई............इस कविता की तारीफ के लिए शायद मेरे पास शव्द नहीं है.............
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap tushar ji
AAP SACH M BAHUT UMDA LIKHTE HAI ....neya ashok
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Niya Ashok --TUSHAR JI --AAJ OFFICE MEN .. AAPKI "GEETON KE BADAL"MILI BAHUT ACCHA LAGA.. BHUMIKA HI PAD KR ..ANKHEN GILI HO GYN... BAHUT MAZBOOT INSAAN HAIN .. AAP ..JO ITNA DUKH SAHKAR BHI JEEVAN KA SANTULAN BANAYE HUE HAIN ....ITNE MUSHKIL DAUR MEN ...AAPNE ITNA UMDA LIKHA HAI.....AAP BAHUT MAHAN HAIN...
Raghvendra Awasthi ---- हर शब्द सराबोर करता है .......भीग - भीग जाता है.. मन .....वाह तुषार जी/
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap ..tushar ji ..
Madhuri Rawat- आपके शब्दों की कशिश भी कुछ कम नहीं तुषार जी /
Sarita Upadhyaya ---vaah apaki lekhani ko pranam lekhani se nikale ek ek shabd ko naman kya likhate hain ----!
Madhuri Rawat-- Command on both languages, Hats off Tushar his ...
Amit Tyagi-- with due respct 2 u... u r an excellent poet..
Kavi Deep Tadiya--- but light is ever same ....like you
Sanjay Kumar--- Tushar ji ,aap ki likhi har pankti men ek nayi soch hoti hai...
Kunwar Ajeet Singh Baghel ---Tushar Ji ,Aapki Kaviytaon ko padhkar lagta hai ki bas sab kuchh chodkar padhte hi raho .
Asha Pandey Ojha Asha ---bahut sundar ,bahut utsaah vardhk
Vijai K Singh--- Aapke paas kavya ki amulya nidhi jo hai ! ! !
Praveen Kumar--- nice lines sir ..........
Vasundhara Pandey ---beautiful sir
Rajesh Kumar Dubey ---हद है दिवानगी की ..वाह वाह
Neeraj Tripathi- मेरी आँखों से मत पूछो ,मेरी दुनिया कैसी है ,
अभी तुम्हारी आँखों से ये, बाहर ही कब निकली है , adbhut
Amit Tyagi-- bahut sundar...tushar ji
Sanjay Kumar---क्या कहने आप के सर जी आपकी लेखनी जादू है , आप का जबाब नहीं मैं आप का एक अदना सा प्रसंसक हूँ /
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
आनंद पाण्डेय ----आश्चर्यजनक,हम तो समझे थे कि अश्कों की किश्तें चुक गईं ---पर रात इक तस्वीर ने फिर से तगाजा कर दिया /
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन ....
Neeraj Tripathi-- awesum sir...laajwaab...shringaar ras se labalab
Dinesh Verma ........
चेतन रामकिशन-
चेतन रामकिशन ---हमने तो आज तक महोदय की जितनी भी रचना पढ़ी हैं, सबने मन को भावों से, विधाओं से और सत्यता से जोड़ा है!
मुझ नवोदित ने उनके हर एक रचना से ज्ञान प्राप्त किया है! न मैं इन्हें शायर मात्र की संज्ञा दूंगा, न ही कवि की! मैं तो इन्हें पूर्ण साहित्यकार कहता हूँ, जो हर विधा में पारंगत हैं! नमन तुषार जी! "
चेतन रामकिशन -- आप की रचना बहुत ही प्यारी होती है , ह्रदय से आभार --
चेतन रामकिशन- आपकी ओजस्वी रचन्नाओं पर कुछ कमेन्ट करने के लिए शब्द ही नहीं मिल पते! बहुत अनमोल रचना!
Manorma Mishra -- unluckly devendar ji , jab aapki pustak mili, main , bahut beemar hu. hospital me hu.bas lete -lete abhi bhumika hi padhi hai . man sochane par vivash ho gaya ki kabhi -kabhi insaan ke saath kuchh na kuchh aisa ghatata rahata hai jisaki use ummeed nahi hoti..sab kuchh aakankhaoon se pare hota hai... jaise kuchh aapke saath hua..... bahut prerna mili mujhe aapse ki insaan ko himmat nahi khona chahiye .
Manorma Mishra --main to dekhakar dang rah jati hun ki .jindagi ke har ahassas ko itni khoobsoorti se shabdo me kaise pirote hain aap...
Navin C. Chaturvedi --आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' बार बार पढ़ रहा हूँ, वाह क्या गीत हैं, आनंद आ रहा है| एक तो मुंबई में वर्षा और उस पर आप के गीतों की रिमझिम,
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Navin C. Chaturvedi---तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-
:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देती है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|
:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
Anand Pandey ----wonderful! Hum to samjhe the ki ashkon ki kishten chuk gayeen-- Par raat ek tasweer ne phir se taqaja kar diya.
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन /.......मैं अभी भी ’गीतों के बादल’ को फाहा-फाहा जी रहा हूँ. आपकी सोच के लालित्य और आपकी लेखिनी के संगीतमय प्रवाह में खूब डूब-उतरा रहा हूँ. इस पर विस्तार से साझा करूँगा. अभी कुछ समय और-और बहने दें./
Toshlendra Pandya-- sir, whether I think your the person who coming on earth to give colours in people blank life.....we need your regular colourful coments to enjoy the beautiful world of God.....
N.p. Jadaun Singh--- ,aapke dwara , AAPKE KAR KAMLON DWARA RACHIT PUSTAK "GEETON KE BAADAL " MUJHE MILI , AAPKI RACHNAON ME EK- EK SHABD SE SHINGAR RAS TAPAKTA HAI, AAP HUM JAISE KARORON PAATHKO KA MAN MOHTE RAHEN. AAPKO BAHUT- BAHUT BADHAIYA ISS SANSKARAN KE LIYE AUR DHANYAVAAD.
Pawan Kumar --Thank you So Much Sir ji..!! Thank you sooo Very much....!! For sending me Your so Beautiful Creation...!! I Love those songs in that book "GEETON kE BAADAL" very much..!!
Subhash Sharma--- Aapke ye--' geeton ke badal ' hi nahi hain-- inmai samudar se bhi jyada gahrai hai.- Aakhen bahut rokne par bhi- gili ho jati hain. Aap ke liye hamare pas shabd nahi hain.-- Aapka Pathak.
Neeraj Tripathi--- ये तुषार के 'गीतों के बादल' हैं,
इनसे पार और कहाँ जाओगे,
इस जीवन की अथाह गर्मी में'
सारी नमी यही पाओगे
Anurag Jagdhari---------
असल ज़िन्दगी में ना जाने कितने झंझावातों से पार हुए हैं आप!सोचता हूँ ना जाने कैसे आप इन सब हालातों में भी कविता करते रहे.खैर दर्द भी कविता को जन्म देता है.अभी कुल जमा 14 कवितायेँ पढ़ी हैं.आप इन हालातों में भी कैसे इतना सृजन कर पाए,आश्चर्य होता है.शेष फिर ..........
Sarita Upadhyaya --तुषार जी ,नमस्कार |
मैं बहुत दिनों से सोच रही थी की आपसे कहूँ न जाने क्यों साहस न जुटा पाई ,आज कह ही रही हूँ मैं भी आपकी पुस्तक ''गीतों के बादल ''को पढ़ने की बड़ी इच्छुक हूँ पार समस्या ये है की वर्तमान में, मैं इस्राएल में हूँ सो नहीं जानती आपसे कैसे कहूँ पुस्तक प्राप्त करने को ;क्या ये पुस्तक नेट प़र उपलब्ध है ---कृपया बताएं |
R.k. Gupta ---तुषार जी --आपका हार्दिक अभिनन्दन....इतनी खूबसूरत कविता बहुत दिनों बाद पडी है.....जयशंकर प्रसाद जी की याद आ गई............इस कविता की तारीफ के लिए शायद मेरे पास शव्द नहीं है.............
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap tushar ji
AAP SACH M BAHUT UMDA LIKHTE HAI ....neya ashok
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Niya Ashok --TUSHAR JI --AAJ OFFICE MEN .. AAPKI "GEETON KE BADAL"MILI BAHUT ACCHA LAGA.. BHUMIKA HI PAD KR ..ANKHEN GILI HO GYN... BAHUT MAZBOOT INSAAN HAIN .. AAP ..JO ITNA DUKH SAHKAR BHI JEEVAN KA SANTULAN BANAYE HUE HAIN ....ITNE MUSHKIL DAUR MEN ...AAPNE ITNA UMDA LIKHA HAI.....AAP BAHUT MAHAN HAIN...
Raghvendra Awasthi ---- हर शब्द सराबोर करता है .......भीग - भीग जाता है.. मन .....वाह तुषार जी/
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap ..tushar ji ..
Madhuri Rawat- आपके शब्दों की कशिश भी कुछ कम नहीं तुषार जी /
Sarita Upadhyaya ---vaah apaki lekhani ko pranam lekhani se nikale ek ek shabd ko naman kya likhate hain ----!
Madhuri Rawat-- Command on both languages, Hats off Tushar his ...
Amit Tyagi-- with due respct 2 u... u r an excellent poet..
Kavi Deep Tadiya--- but light is ever same ....like you
Sanjay Kumar--- Tushar ji ,aap ki likhi har pankti men ek nayi soch hoti hai...
Kunwar Ajeet Singh Baghel ---Tushar Ji ,Aapki Kaviytaon ko padhkar lagta hai ki bas sab kuchh chodkar padhte hi raho .
Asha Pandey Ojha Asha ---bahut sundar ,bahut utsaah vardhk
Vijai K Singh--- Aapke paas kavya ki amulya nidhi jo hai ! ! !
Praveen Kumar--- nice lines sir ..........
Vasundhara Pandey ---beautiful sir
Rajesh Kumar Dubey ---हद है दिवानगी की ..वाह वाह
Neeraj Tripathi- मेरी आँखों से मत पूछो ,मेरी दुनिया कैसी है ,
अभी तुम्हारी आँखों से ये, बाहर ही कब निकली है , adbhut
Amit Tyagi-- bahut sundar...tushar ji
Sanjay Kumar---क्या कहने आप के सर जी आपकी लेखनी जादू है , आप का जबाब नहीं मैं आप का एक अदना सा प्रसंसक हूँ /
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
आनंद पाण्डेय ----आश्चर्यजनक,हम तो समझे थे कि अश्कों की किश्तें चुक गईं ---पर रात इक तस्वीर ने फिर से तगाजा कर दिया /
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन ....
Neeraj Tripathi-- awesum sir...laajwaab...shringaar ras se labalab
Dinesh Verma ........
शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011
संजय कुमार --
आप के हाथो में जादू है , आप की कृति अतुल्य है , देवेन्द्र जी माँ सस्वती आप को और भी शब्दों का अमृत बरसाने के लिए आशीष दे ...
चेतन रामकिशन ---
हमने तो आज तक महोदय की जितनी भी रचना पढ़ी हैं, सबने मन को भावों से, विधाओं से और सत्यता से जोड़ा है!
मुझ नवोदित ने उनके हर एक रचना से ज्ञान प्राप्त किया है! न मैं इन्हें शायर मात्र की संज्ञा दूंगा, न ही कवि की! मैं तो इन्हें पूर्ण साहित्यकार कहता हूँ, जो हर विधा में पारंगत हैं! नमन तुषार जी! "
आप के हाथो में जादू है , आप की कृति अतुल्य है , देवेन्द्र जी माँ सस्वती आप को और भी शब्दों का अमृत बरसाने के लिए आशीष दे ...
चेतन रामकिशन ---
हमने तो आज तक महोदय की जितनी भी रचना पढ़ी हैं, सबने मन को भावों से, विधाओं से और सत्यता से जोड़ा है!
मुझ नवोदित ने उनके हर एक रचना से ज्ञान प्राप्त किया है! न मैं इन्हें शायर मात्र की संज्ञा दूंगा, न ही कवि की! मैं तो इन्हें पूर्ण साहित्यकार कहता हूँ, जो हर विधा में पारंगत हैं! नमन तुषार जी! "
कुमार -- आप के हाथो में जादू है , आप की कृति ... atuly hai ...
Manorma Mishra --main to dekhakar dang rah jati hun ki .jindagi ke har ahassas ko itni khoobsoorti se shabdo me kaise pirote hain aap...
Navin C. Chaturvedi---
तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-
:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देती है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|
:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
Anand Pandey ----wonderful! Hum to samjhe the ki ashkon ki kishten chuk gayeen-- Par raat ek tasweer ne phir se taqaja kar diya.
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन /.......मैं अभी भी ’गीतों के बादल’ को फाहा-फाहा जी रहा हूँ. आपकी सोच के लालित्य और आपकी लेखिनी के संगीतमय प्रवाह में खूब डूब-उतरा रहा हूँ. इस पर विस्तार से साझा करूँगा. अभी कुछ समय और-और बहने दें./
Navin C. Chaturvedi आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' बार बार पढ़ रहा हूँ, वाह क्या गीत हैं, आनंद आ रहा है| एक तो मुंबई में वर्षा और उस पर आप के गीतों की रिमझिम,
Toshlendra Pandya-- sir, whether I think your the person who coming on earth to give colours in people blank life.....we need your regular colourful coments to enjoy the beautiful world of God.....
N.p. Jadaun Singh--- ,aapke dwara , AAPKE KAR KAMLON DWARA RACHIT PUSTAK "GEETON KE BAADAL " MUJHE MILI , AAPKI RACHNAON ME EK- EK SHABD SE SHINGAR RAS TAPAKTA HAI, AAP HUM JAISE KARORON PAATHKO KA MAN MOHTE RAHEN. AAPKO BAHUT- BAHUT BADHAIYA ISS SANSKARAN KE LIYE AUR DHANYAVAAD. NARENDRA SINGH JADAUN
Pawan Kumar --Thank you So Much Sir ji..!! Thank you sooo Very much....!! For sending me Your so Beautiful Creation...!! I Love those songs in that book "GEETON kE BAADAL" very much..!!
Subhash Sharma--- Aapke ye--' geeton ke badal ' hi nahi hain-- inmai samudar se bhi jyada gahrai hai.- Aakhen bahut rokne par bhi- gili ho jati hain. Aap ke liye hamare pas shabd nahi hain.-- Aapka Pathak.
Neeraj Tripathi--- ये तुषार के 'गीतों के बादल' हैं,
इनसे पार और कहाँ जाओगे,
इस जीवन की अथाह गर्मी में'
सारी नमी यही पाओगे
Anurag Jagdhari---------
असल ज़िन्दगी में ना जाने कितने झंझावातों से पार हुए हैं आप!सोचता हूँ ना जाने कैसे आप इन सब हालातों में भी कविता करते रहे.खैर दर्द भी कविता को जन्म देता है.अभी कुल जमा 14 कवितायेँ पढ़ी हैं.आप इन हालातों में भी कैसे इतना सृजन कर पाए,आश्चर्य होता है.शेष फिर ..........
Sarita Upadhyaya --तुषार जी ,
नमस्कार |
मैं बहुत दिनों से सोच रही थी की आपसे कहूँ न जाने क्यों साहस न जुटा पाई ,आज कह ही रही हूँ मैं भी आपकी पुस्तक ''गीतों के बादल ''को पढ़ने की बड़ी इच्छुक हूँ पार समस्या ये है की वर्तमान में, मैं इस्राएल में हूँ सो नहीं जानती आपसे कैसे कहूँ पुस्तक प्राप्त करने को ;क्या ये पुस्तक नेट प़र उपलब्ध है ---कृपया बताएं |
unluckly devendar ji , jab aapki pustak mili, main , bahut beemar hu. hospital me hu.bas lete -lete abhi bhumika hi padhi hai . man sochane par vivash ho gaya ki kabhi -kabhi insaan ke saath kuchh na kuchh aisa ghatata rahata hai jisaki use ummeed nahi hoti..sab kuchh aakankhaoon se pare hota hai... jaise kuchh aapke saath hua.....
bahut prerna mili mujhe aapse ki insaan ko himmat nahi khona chahiye .
R.k. Gupta ---तुषार जी --आपका हार्दिक अभिनन्दन....इतनी खूबसूरत कविता बहुत दिनों बाद पडी है.....जयशंकर प्रसाद जी की याद आ गई............इस कविता की तारीफ के लिए शायद मेरे पास शव्द नहीं है.............
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap tushar ji
AAP SACH M BAHUT UMDA LIKHTE HAI ....neya ashok
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Niya Ashok --TUSHAR JI --AAJ OFFICE MEN .. AAPKI "GEETON KE BADAL"MILI BAHUT ACCHA LAGA.. BHUMIKA HI PAD KR ..ANKHEN GILI HO GYN... BAHUT MAZBOOT INSAAN HAIN .. AAP ..JO ITNA DUKH SAHKAR BHI JEEVAN KA SANTULAN BANAYE HUE HAIN ....ITNE MUSHKIL DAUR MEN ...AAPNE ITNA UMDA LIKHA HAI.....AAP BAHUT MAHAN HAIN...
Raghvendra Awasthi ---- हर शब्द सराबोर करता है .......भीग - भीग जाता है.. मन .....वाह तुषार जी/
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap ..tushar ji ..
Madhuri Rawat- आपके शब्दों की कशिश भी कुछ कम नहीं तुषार जी /
Sarita Upadhyaya ---vaah apaki lekhani ko pranam lekhani se nikale ek ek shabd ko naman kya likhate hain ----!
Madhuri Rawat-- Command on both languages, Hats off Tushar his ...
Amit Tyagi-- with due respct 2 u... u r an excellent poet..
Kavi Deep Tadiya--- but light is ever same ....like you
Sanjay Kumar--- Tushar ji ,aap ki likhi har pankti men ek nayi soch hoti hai...
चेतन रामकिशन ---शानदार पंक्तियाँ,शानदार आह्वान,आपके सोहार्द पूर्ण, जोश पूर्ण साहित्य को नमन!
Kunwar Ajeet Singh Baghel ---Tushar Ji ,Aapki Kaviytaon ko padhkar lagta hai ki bas sab kuchh chodkar padhte hi raho .
Asha Pandey Ojha Asha ---bahut sundar ,bahut utsaah vardhk
Vijai K Singh--- Aapke paas kavya ki amulya nidhi jo hai ! ! !
Praveen Kumar--- nice lines sir ..........
Vasundhara Pandey ---beautiful sir
Rajesh Kumar Dubey ---हद है दिवानगी की ..वाह वाह
चेतन रामकिशन- आपकी ओजस्वी रचन्नाओं पर कुछ कमेन्ट करने के लिए शब्द ही नहीं मिल पते! बहुत अनमोल रचना!
Neeraj Tripathi- मेरी आँखों से मत पूछो ,मेरी दुनिया कैसी है ,
अभी तुम्हारी आँखों से ये, बाहर ही कब निकली है , adbhut
Amit Tyagi-- bahut sundar...tushar ji
Sanjay Kumar---क्या कहने आप के सर जी आपकी लेखनी जादू है , आप का जबाब नहीं मैं आप का एक अदना सा प्रसंसक हूँ /
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
आनंद पाण्डेय ----आश्चर्यजनक,हम तो समझे थे कि अश्कों की किश्तें चुक गईं ---पर रात इक तस्वीर ने फिर से तगाजा कर दिया /
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन ....
Neeraj Tripathi-- awesum sir...laajwaab...shringaar ras se labalab
Dinesh Verma ........
आप की रचना बहुत ही प्यारी होती है , ह्रदय से आभार
चेतन रामकिशन ----आपकी हर
Manorma Mishra --main to dekhakar dang rah jati hun ki .jindagi ke har ahassas ko itni khoobsoorti se shabdo me kaise pirote hain aap...
Navin C. Chaturvedi---
तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-
:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देती है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|
:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
Anand Pandey ----wonderful! Hum to samjhe the ki ashkon ki kishten chuk gayeen-- Par raat ek tasweer ne phir se taqaja kar diya.
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन /.......मैं अभी भी ’गीतों के बादल’ को फाहा-फाहा जी रहा हूँ. आपकी सोच के लालित्य और आपकी लेखिनी के संगीतमय प्रवाह में खूब डूब-उतरा रहा हूँ. इस पर विस्तार से साझा करूँगा. अभी कुछ समय और-और बहने दें./
Navin C. Chaturvedi आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' बार बार पढ़ रहा हूँ, वाह क्या गीत हैं, आनंद आ रहा है| एक तो मुंबई में वर्षा और उस पर आप के गीतों की रिमझिम,
Toshlendra Pandya-- sir, whether I think your the person who coming on earth to give colours in people blank life.....we need your regular colourful coments to enjoy the beautiful world of God.....
N.p. Jadaun Singh--- ,aapke dwara , AAPKE KAR KAMLON DWARA RACHIT PUSTAK "GEETON KE BAADAL " MUJHE MILI , AAPKI RACHNAON ME EK- EK SHABD SE SHINGAR RAS TAPAKTA HAI, AAP HUM JAISE KARORON PAATHKO KA MAN MOHTE RAHEN. AAPKO BAHUT- BAHUT BADHAIYA ISS SANSKARAN KE LIYE AUR DHANYAVAAD. NARENDRA SINGH JADAUN
Pawan Kumar --Thank you So Much Sir ji..!! Thank you sooo Very much....!! For sending me Your so Beautiful Creation...!! I Love those songs in that book "GEETON kE BAADAL" very much..!!
Subhash Sharma--- Aapke ye--' geeton ke badal ' hi nahi hain-- inmai samudar se bhi jyada gahrai hai.- Aakhen bahut rokne par bhi- gili ho jati hain. Aap ke liye hamare pas shabd nahi hain.-- Aapka Pathak.
Neeraj Tripathi--- ये तुषार के 'गीतों के बादल' हैं,
इनसे पार और कहाँ जाओगे,
इस जीवन की अथाह गर्मी में'
सारी नमी यही पाओगे
Anurag Jagdhari---------
असल ज़िन्दगी में ना जाने कितने झंझावातों से पार हुए हैं आप!सोचता हूँ ना जाने कैसे आप इन सब हालातों में भी कविता करते रहे.खैर दर्द भी कविता को जन्म देता है.अभी कुल जमा 14 कवितायेँ पढ़ी हैं.आप इन हालातों में भी कैसे इतना सृजन कर पाए,आश्चर्य होता है.शेष फिर ..........
Sarita Upadhyaya --तुषार जी ,
नमस्कार |
मैं बहुत दिनों से सोच रही थी की आपसे कहूँ न जाने क्यों साहस न जुटा पाई ,आज कह ही रही हूँ मैं भी आपकी पुस्तक ''गीतों के बादल ''को पढ़ने की बड़ी इच्छुक हूँ पार समस्या ये है की वर्तमान में, मैं इस्राएल में हूँ सो नहीं जानती आपसे कैसे कहूँ पुस्तक प्राप्त करने को ;क्या ये पुस्तक नेट प़र उपलब्ध है ---कृपया बताएं |
unluckly devendar ji , jab aapki pustak mili, main , bahut beemar hu. hospital me hu.bas lete -lete abhi bhumika hi padhi hai . man sochane par vivash ho gaya ki kabhi -kabhi insaan ke saath kuchh na kuchh aisa ghatata rahata hai jisaki use ummeed nahi hoti..sab kuchh aakankhaoon se pare hota hai... jaise kuchh aapke saath hua.....
bahut prerna mili mujhe aapse ki insaan ko himmat nahi khona chahiye .
R.k. Gupta ---तुषार जी --आपका हार्दिक अभिनन्दन....इतनी खूबसूरत कविता बहुत दिनों बाद पडी है.....जयशंकर प्रसाद जी की याद आ गई............इस कविता की तारीफ के लिए शायद मेरे पास शव्द नहीं है.............
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap tushar ji
AAP SACH M BAHUT UMDA LIKHTE HAI ....neya ashok
Navin C. Chaturvedi--- भोर की हैं अर्चनायें,
शब्दों के चितेरे हैं आप................. :)
Niya Ashok --TUSHAR JI --AAJ OFFICE MEN .. AAPKI "GEETON KE BADAL"MILI BAHUT ACCHA LAGA.. BHUMIKA HI PAD KR ..ANKHEN GILI HO GYN... BAHUT MAZBOOT INSAAN HAIN .. AAP ..JO ITNA DUKH SAHKAR BHI JEEVAN KA SANTULAN BANAYE HUE HAIN ....ITNE MUSHKIL DAUR MEN ...AAPNE ITNA UMDA LIKHA HAI.....AAP BAHUT MAHAN HAIN...
Raghvendra Awasthi ---- हर शब्द सराबोर करता है .......भीग - भीग जाता है.. मन .....वाह तुषार जी/
Avanti Singh--- bahut achcha likhte hain aap ..tushar ji ..
Madhuri Rawat- आपके शब्दों की कशिश भी कुछ कम नहीं तुषार जी /
Sarita Upadhyaya ---vaah apaki lekhani ko pranam lekhani se nikale ek ek shabd ko naman kya likhate hain ----!
Madhuri Rawat-- Command on both languages, Hats off Tushar his ...
Amit Tyagi-- with due respct 2 u... u r an excellent poet..
Kavi Deep Tadiya--- but light is ever same ....like you
Sanjay Kumar--- Tushar ji ,aap ki likhi har pankti men ek nayi soch hoti hai...
चेतन रामकिशन ---शानदार पंक्तियाँ,शानदार आह्वान,आपके सोहार्द पूर्ण, जोश पूर्ण साहित्य को नमन!
Kunwar Ajeet Singh Baghel ---Tushar Ji ,Aapki Kaviytaon ko padhkar lagta hai ki bas sab kuchh chodkar padhte hi raho .
Asha Pandey Ojha Asha ---bahut sundar ,bahut utsaah vardhk
Vijai K Singh--- Aapke paas kavya ki amulya nidhi jo hai ! ! !
Praveen Kumar--- nice lines sir ..........
Vasundhara Pandey ---beautiful sir
Rajesh Kumar Dubey ---हद है दिवानगी की ..वाह वाह
चेतन रामकिशन- आपकी ओजस्वी रचन्नाओं पर कुछ कमेन्ट करने के लिए शब्द ही नहीं मिल पते! बहुत अनमोल रचना!
Neeraj Tripathi- मेरी आँखों से मत पूछो ,मेरी दुनिया कैसी है ,
अभी तुम्हारी आँखों से ये, बाहर ही कब निकली है , adbhut
Amit Tyagi-- bahut sundar...tushar ji
Sanjay Kumar---क्या कहने आप के सर जी आपकी लेखनी जादू है , आप का जबाब नहीं मैं आप का एक अदना सा प्रसंसक हूँ /
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
आनंद पाण्डेय ----आश्चर्यजनक,हम तो समझे थे कि अश्कों की किश्तें चुक गईं ---पर रात इक तस्वीर ने फिर से तगाजा कर दिया /
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन ....
Neeraj Tripathi-- awesum sir...laajwaab...shringaar ras se labalab
Dinesh Verma ........
आप की रचना बहुत ही प्यारी होती है , ह्रदय से आभार
चेतन रामकिशन ----आपकी हर
उक्त दोनों मुक्तक इस कृति के आमुख माने जा सकते हैं /प्रथम में कवि प्रीत की फुहार को ,धूप -छाँव से सने पलों को,झील की आभा में झाँक कर अपनी भाव -प्रवंचनाओं को व्यक्त करता है /प्रियतमा के स्वच्छ निर्मल बिम्बों को प्रकृति के शाश्वत फ्रेम में जड़ देता है /यह कृति का एक रंग है /दुसरे मुक्तक में कवि महादेवी वर्मा की भाँति ---मैं नीर भरी दुख की बदली अथवा जय शंकर प्रसाद जी के ---आँसू ---की तरह अपनी पीड़ा को एक गरल की तरह हँसते - हँसते पी जाना चाहता है / रचनाओं को इस करीने से सजाया व संवारा गया है ,कि एक लय -प्रवाह अंत तक कहीं टूटता नहीं है ,कहीं बिखरता नहीं है अपितु कवि दिल -दिमाग पर छा
जाता है/उदाहरण के लिए ----
निमिष -निमिष नयनों में क्या है ,एक झील सी प्रीत तुम्हारी,
अंग -अंग पर खेल रही है ,धूप तुम्हारी छाँव हमारी //
एवम
छुपे -छुपे ही रह जाते हैं ,अक्सर आँखों में कुछ आँसू ,
जीने वाले जी लेते हैं ,पी -पी कर ही अपने आँसू //
श्रंगार को रसराज कहा गया है, डा ० हरिवंश राय बच्चन के अनुसार कवि रूमानी- भावनाओं को सहजता से अभिव्यक्त करने में सफल है ,इसमें कोई शक नहीं /गीतों के बादल---- में कवि के कुछ गीत श्रंगार की इस रसमयता को तन्मयता से भर देने में सक्षम हैं------
जितनी रस की धारायें थीं ,उन्मीलित-सी परिप्लावित थीं,
दिशा -दिशा में आवाहन था , मंद हवायें आह्लादित थीं //
एवम
तुम नहाकर चाँदनी में , केश अपने मत सुखाओ ,
रात ठिठकी सी हुई है , चाँद ठिठका -सा खड़ा है //
कवि अपने जीवन की रिक्तता का भी आभास बड़ी सहजता से कराता है ,वो प्रकृति और
प्रियतमा में ऐसा साम्य स्थापित कर देता है कि उसकी अभिव्यक्ति बिम्बों को एकाकार
कर देती है /ऐसा अद्भुत समायोजन ....नदी के दो किनारों की तरह ,प्रीत के दो किनारे नहीं हो सकते ,यह ---तुषार-- जैसे कवि की सामर्थ्य का प्रमाण है /कवि अमूर्त प्रेम को मूर्त प्रेम में ,,,मूर्त प्रेम को अमूर्त प्रेम में ,रेखांकित करता है या मन को ,कहाँ तक छूता हुआ निकल जाता है पता नहीं चलता /
प्रीत के दो - दो किनारे ,हो नहीं सकते यहाँ पर ,
एक तुम छूलो बहाँ पर, एक में छूलूं यहाँ पर //
उक्त तीनों अन्तराएँ प्रेम की पराकाष्ठा को व्यक्त करने के लिए एक अभिनव उद्यम हैं /कवि द्वारा प्रथम अंतरे में प्रकृति के सुन्दर प्रतीकों का प्रयोग ,प्यार की खुशबु बिखेरने का ,बसंत के आगमन पर नव कोंपलों का आकार लेती प्रियतमा का ,मन प्राणों में घुल जाने का द्रश्य देखते ही बनता है /
इसी प्रकार विप्रलंभ श्रंगार या वियोग श्रंगार के चित्रण देखें ----
जब तुझे पाया जगत में ,कुछ बहारें आ गईं थीं ,
अब बहारों में हमारा छटपटाना रह गया है //
एवम
मैं पराजित हो गया हूँ ,मानने में हर्ज क्या है ,
...तुम लड़ो या मत लड़ो ,यह बक्त तो लड़ता रहेगा //
और थोड़ा आगे चलें ....
सिर्फ आँचल में तुम्हारे ,बंध नहीं सकती जवानी ,
तन-बदन से छन रही है सौ बहारों की रवानी //
कवि ,जवानी के उद्दाम वेग को बांध सके यह उसके बश की बात नहीं /प्रियतमा की काया की, सैकड़ों बहारों से तुलना करके किसी भी लफ्फाजी से ...परे होना चाहता है /कवि का यह कथन कि उसने इन पलों को जीकर लिखा है नयनों को झील की संज्ञा युगों- युगों से दी जाती है पर यहाँ उनकी ताजगी में डूबने की बात ,चाँद के ठिठकने की बात ,चाँदनी रात में केश सुखाने की बात ,कवि के अद्भुत काल -जई प्रेम की कहानी कह रही है /
उक्त उदाहरणों में कवि द्वारा प्रेम की पराकाष्ठा को श्रंगार में भिगो -भिगो कर व्यक्त किया गया है/
कवि समस्त रस-धाराओं में--- प्रेम ---को आप्लावित कर ,समस्त सृष्ठी में ओत-प्रोत कर देता है /दसों दिशायें हों ,उन्चासों समीर, उसके स्वर से स्वर मिलाते जान पड़ते हैं /स्नेह- राग ,की इतनी अभूतपूर्व अभिव्यक्ति ...प्रियतमा का आँचल पूरे जगत का बिस्तार हो जाता है - यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----
कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन //
कवि शब्द चयन में मनोभावों को बाँधने में इतना सक्षम है कि शिल्पगत बिविधता के बिना भी
एक नया शिल्प रच देता है /उसकी शाब्दिक ध्वनि का निरूपण देखें ---
नयनों में सावन आता है ,नयनों में पतझड़ होता है ,
नयनों में प्रियतम बसता है, सपनों का मरमर होता है //
यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार--के आलोच्य संग्रह में शब्द अपने सर्जक के मनोभावों पर नृत्य करते हैं /शिल्प ,सज्जा का ध्यान रखता है / कथन , एक मंच की तरह है /अलंकार व समास आवश्यक भाव भंगिमायें हैं /और इनसे जो रस की निष्पत्ति होती है अभूतपूर्व माधुर्य में बदल जाती है /जैसे इस जगत की या वक्त की परिणति तक पहुँचा देती है /उसके अनुसार जगत का सार प्रेम है --
जब तुम्हें पाया जगत में ,कुछ बहारें आ गईं थीं ,अन्यथा सब निस्सार है /कवि अपने मिथ्या अहम् को अपनी हार के रूप में स्वीकार करने से नहीं झिझकता मगर वो अपने प्रेम का बक्त के साथ टकराव भी स्वीकार करता है /तुम लड़ो या मत लड़ो ,ये वक्त तो लड़ता रहेगा ,लेकिन वो अपने और अपने प्रेम के आस्तित्व को क्षणभंगुर मानने से इंकार कर देता है / कवि जब निराशा के गहन -अंधकार में घिरता है ,उसकी स्याह चादर में अपने साथ
सब कुछ समेट लेना चाहता है .....
चाहे कितने अश्रु बहा लूँ ,तुम्हें न बापस ला पाऊंगा ,
चाहे कितना प्यार जता लूँ ,तुम्हें न फिर से पा पाऊंगा //
वो एक ऐसे कथ्य में डूब जाता है ,जिसकी कल्पना जायसी ,घनानंद जैसे कवि भी नहीं कर पाये /बिद्यापति के भावों में भी इतनी रहस्य बेदना शायद न होगी / इस जगह पर कवि बड़ी चित्रकारी से नयनों को प्रकृति पर अबलंबित कर उसका विबेचन किया है /
तुषार; कविता को लिखते नहीं हैं वरन जीते हुए निकल जाते हैं /उनका यह जीना ,मरना कोई भी पाठक या व्यक्ति झील सी गहरी आँखों में झाँक कर देखेगा तो खुद व खुद समझ आ जायेगा /कवि का अंदाजे बयाँ एक साथ कितने जादू कर देता है ,देखते ही बनता है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----
कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन //
कवि बिना कोई परवाह किये परम्परागत गीतिकाव्य -धारा पुष्ट करता हुआ ,उसे नयी भव्यता देकर एक उत्कृष्ट काव्य- संग्रह हिंदी साहित्य को देने में न केवल सफल हुआ है ,बल्कि एक भीनी- भीनी रसधारा से परिप्लावित कर अपने पाठकों में लोकप्रिय हो चुका है /
संक्षेप में कवि ने अनुभूतियों के अनुभाव - विभाव का अमृत मंथन किया है /वो अपनी मधुशाला को ,अपने गीतों को ,अपने जीवन से निचोड़ कर भरता है /आज भाग-दौड़ से भरी जिन्दगी में ,हिंदी कविता अपनी दशा और दिशा निर्धारित नहीं कर पा रही है /क्या लिखा जाये क्या नहीं ,तरह -तरह के शिल्प -विधा चल पड़े हैं /यहाँ तक कि शब्दों का प्रयोग भी स्थिर नहीं है,...
देख लीजिये तुषार; क्या कह रहे हैं -----
क्या पता इस जिन्दगी के पार कोई जिन्दगी हो ,
जो विधाता से बड़ी हो, जो तुम्हीं से बस उगी हो //
निराशायें हार जातीं हैं ,कवि जीत जाता है ....
उसकी लेखनी में प्रसाद की कसमसाहट ,महादेवी रहस्य पीड़ा भी अगर झलकती है तो अपने विशिष्ट परिवेश को उदघोषित करके झलकती है / वो पंत और निराला की तरह एक चित्र ही नहीं बनाता ,चित्र में घोर निराशा के बाबजूद ,प्राणोंन्मेश भी कर देता है /
समीक्षाकार --- डा० जय शंकर शुक्ल' किरण 'ऍम .ऐ .ऍम .एड .पी .एच .डी .
शिक्षा विभाग ,दिल्ली सरकार [काव्य संग्रह गीतों के बादल ]तुषार'अयन प्रकाशन , नयी दिल्ली
जाता है/उदाहरण के लिए ----
निमिष -निमिष नयनों में क्या है ,एक झील सी प्रीत तुम्हारी,
अंग -अंग पर खेल रही है ,धूप तुम्हारी छाँव हमारी //
एवम
छुपे -छुपे ही रह जाते हैं ,अक्सर आँखों में कुछ आँसू ,
जीने वाले जी लेते हैं ,पी -पी कर ही अपने आँसू //
श्रंगार को रसराज कहा गया है, डा ० हरिवंश राय बच्चन के अनुसार कवि रूमानी- भावनाओं को सहजता से अभिव्यक्त करने में सफल है ,इसमें कोई शक नहीं /गीतों के बादल---- में कवि के कुछ गीत श्रंगार की इस रसमयता को तन्मयता से भर देने में सक्षम हैं------
जितनी रस की धारायें थीं ,उन्मीलित-सी परिप्लावित थीं,
दिशा -दिशा में आवाहन था , मंद हवायें आह्लादित थीं //
एवम
तुम नहाकर चाँदनी में , केश अपने मत सुखाओ ,
रात ठिठकी सी हुई है , चाँद ठिठका -सा खड़ा है //
कवि अपने जीवन की रिक्तता का भी आभास बड़ी सहजता से कराता है ,वो प्रकृति और
प्रियतमा में ऐसा साम्य स्थापित कर देता है कि उसकी अभिव्यक्ति बिम्बों को एकाकार
कर देती है /ऐसा अद्भुत समायोजन ....नदी के दो किनारों की तरह ,प्रीत के दो किनारे नहीं हो सकते ,यह ---तुषार-- जैसे कवि की सामर्थ्य का प्रमाण है /कवि अमूर्त प्रेम को मूर्त प्रेम में ,,,मूर्त प्रेम को अमूर्त प्रेम में ,रेखांकित करता है या मन को ,कहाँ तक छूता हुआ निकल जाता है पता नहीं चलता /
प्रीत के दो - दो किनारे ,हो नहीं सकते यहाँ पर ,
एक तुम छूलो बहाँ पर, एक में छूलूं यहाँ पर //
उक्त तीनों अन्तराएँ प्रेम की पराकाष्ठा को व्यक्त करने के लिए एक अभिनव उद्यम हैं /कवि द्वारा प्रथम अंतरे में प्रकृति के सुन्दर प्रतीकों का प्रयोग ,प्यार की खुशबु बिखेरने का ,बसंत के आगमन पर नव कोंपलों का आकार लेती प्रियतमा का ,मन प्राणों में घुल जाने का द्रश्य देखते ही बनता है /
इसी प्रकार विप्रलंभ श्रंगार या वियोग श्रंगार के चित्रण देखें ----
जब तुझे पाया जगत में ,कुछ बहारें आ गईं थीं ,
अब बहारों में हमारा छटपटाना रह गया है //
एवम
मैं पराजित हो गया हूँ ,मानने में हर्ज क्या है ,
...तुम लड़ो या मत लड़ो ,यह बक्त तो लड़ता रहेगा //
और थोड़ा आगे चलें ....
सिर्फ आँचल में तुम्हारे ,बंध नहीं सकती जवानी ,
तन-बदन से छन रही है सौ बहारों की रवानी //
कवि ,जवानी के उद्दाम वेग को बांध सके यह उसके बश की बात नहीं /प्रियतमा की काया की, सैकड़ों बहारों से तुलना करके किसी भी लफ्फाजी से ...परे होना चाहता है /कवि का यह कथन कि उसने इन पलों को जीकर लिखा है नयनों को झील की संज्ञा युगों- युगों से दी जाती है पर यहाँ उनकी ताजगी में डूबने की बात ,चाँद के ठिठकने की बात ,चाँदनी रात में केश सुखाने की बात ,कवि के अद्भुत काल -जई प्रेम की कहानी कह रही है /
उक्त उदाहरणों में कवि द्वारा प्रेम की पराकाष्ठा को श्रंगार में भिगो -भिगो कर व्यक्त किया गया है/
कवि समस्त रस-धाराओं में--- प्रेम ---को आप्लावित कर ,समस्त सृष्ठी में ओत-प्रोत कर देता है /दसों दिशायें हों ,उन्चासों समीर, उसके स्वर से स्वर मिलाते जान पड़ते हैं /स्नेह- राग ,की इतनी अभूतपूर्व अभिव्यक्ति ...प्रियतमा का आँचल पूरे जगत का बिस्तार हो जाता है - यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----
कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन //
कवि शब्द चयन में मनोभावों को बाँधने में इतना सक्षम है कि शिल्पगत बिविधता के बिना भी
एक नया शिल्प रच देता है /उसकी शाब्दिक ध्वनि का निरूपण देखें ---
नयनों में सावन आता है ,नयनों में पतझड़ होता है ,
नयनों में प्रियतम बसता है, सपनों का मरमर होता है //
यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार--के आलोच्य संग्रह में शब्द अपने सर्जक के मनोभावों पर नृत्य करते हैं /शिल्प ,सज्जा का ध्यान रखता है / कथन , एक मंच की तरह है /अलंकार व समास आवश्यक भाव भंगिमायें हैं /और इनसे जो रस की निष्पत्ति होती है अभूतपूर्व माधुर्य में बदल जाती है /जैसे इस जगत की या वक्त की परिणति तक पहुँचा देती है /उसके अनुसार जगत का सार प्रेम है --
जब तुम्हें पाया जगत में ,कुछ बहारें आ गईं थीं ,अन्यथा सब निस्सार है /कवि अपने मिथ्या अहम् को अपनी हार के रूप में स्वीकार करने से नहीं झिझकता मगर वो अपने प्रेम का बक्त के साथ टकराव भी स्वीकार करता है /तुम लड़ो या मत लड़ो ,ये वक्त तो लड़ता रहेगा ,लेकिन वो अपने और अपने प्रेम के आस्तित्व को क्षणभंगुर मानने से इंकार कर देता है / कवि जब निराशा के गहन -अंधकार में घिरता है ,उसकी स्याह चादर में अपने साथ
सब कुछ समेट लेना चाहता है .....
चाहे कितने अश्रु बहा लूँ ,तुम्हें न बापस ला पाऊंगा ,
चाहे कितना प्यार जता लूँ ,तुम्हें न फिर से पा पाऊंगा //
वो एक ऐसे कथ्य में डूब जाता है ,जिसकी कल्पना जायसी ,घनानंद जैसे कवि भी नहीं कर पाये /बिद्यापति के भावों में भी इतनी रहस्य बेदना शायद न होगी / इस जगह पर कवि बड़ी चित्रकारी से नयनों को प्रकृति पर अबलंबित कर उसका विबेचन किया है /
तुषार; कविता को लिखते नहीं हैं वरन जीते हुए निकल जाते हैं /उनका यह जीना ,मरना कोई भी पाठक या व्यक्ति झील सी गहरी आँखों में झाँक कर देखेगा तो खुद व खुद समझ आ जायेगा /कवि का अंदाजे बयाँ एक साथ कितने जादू कर देता है ,देखते ही बनता है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----
कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन //
कवि बिना कोई परवाह किये परम्परागत गीतिकाव्य -धारा पुष्ट करता हुआ ,उसे नयी भव्यता देकर एक उत्कृष्ट काव्य- संग्रह हिंदी साहित्य को देने में न केवल सफल हुआ है ,बल्कि एक भीनी- भीनी रसधारा से परिप्लावित कर अपने पाठकों में लोकप्रिय हो चुका है /
संक्षेप में कवि ने अनुभूतियों के अनुभाव - विभाव का अमृत मंथन किया है /वो अपनी मधुशाला को ,अपने गीतों को ,अपने जीवन से निचोड़ कर भरता है /आज भाग-दौड़ से भरी जिन्दगी में ,हिंदी कविता अपनी दशा और दिशा निर्धारित नहीं कर पा रही है /क्या लिखा जाये क्या नहीं ,तरह -तरह के शिल्प -विधा चल पड़े हैं /यहाँ तक कि शब्दों का प्रयोग भी स्थिर नहीं है,...
देख लीजिये तुषार; क्या कह रहे हैं -----
क्या पता इस जिन्दगी के पार कोई जिन्दगी हो ,
जो विधाता से बड़ी हो, जो तुम्हीं से बस उगी हो //
निराशायें हार जातीं हैं ,कवि जीत जाता है ....
उसकी लेखनी में प्रसाद की कसमसाहट ,महादेवी रहस्य पीड़ा भी अगर झलकती है तो अपने विशिष्ट परिवेश को उदघोषित करके झलकती है / वो पंत और निराला की तरह एक चित्र ही नहीं बनाता ,चित्र में घोर निराशा के बाबजूद ,प्राणोंन्मेश भी कर देता है /
समीक्षाकार --- डा० जय शंकर शुक्ल' किरण 'ऍम .ऐ .ऍम .एड .पी .एच .डी .
शिक्षा विभाग ,दिल्ली सरकार [काव्य संग्रह गीतों के बादल ]तुषार'अयन प्रकाशन , नयी दिल्ली
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