शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

संजय कुमार --
आप के हाथो में जादू है , आप की कृति अतुल्य है , देवेन्द्र जी माँ सस्वती आप को और भी शब्दों का अमृत बरसाने के लिए आशीष दे ...


चेतन रामकिशन ---
हमने तो आज तक महोदय की जितनी भी रचना पढ़ी हैं, सबने मन को भावों से, विधाओं से और सत्यता से जोड़ा है!
मुझ नवोदित ने उनके हर एक रचना से ज्ञान प्राप्त किया है! न मैं इन्हें शायर मात्र की संज्ञा दूंगा, न ही कवि की! मैं तो इन्हें पूर्ण साहित्यकार कहता हूँ, जो हर विधा में पारंगत हैं! नमन तुषार जी! "

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