मंगलवार, 24 मई 2011

R.k. Gupta तुषार जी --आपका हार्दिक अभिनन्दन....इतनी खूबसूरत कविता बहुत दिनों बाद पडी है.....जयशंकर प्रसाद जी की याद आगई............इस कविता की तारीफ के लिए शायद मेरे पास शव्द नहीं है.............
May 15 at 10:37pm · Arun Sagar--tushar ji -kee pustak 'geeton ke badal' ek prati mujhe bhee praapt huyee hai.padhane ke baad yah pataa chalaa kee geeton ke madhyam se zindagee ke dard ko panqtiyon me kaise ubhaaraa jaataa hai.ek-ek chha...nd padhakar aankhon me ---aansoo chhalak gaye.--geet kee samast vidhaon ka is pustak men ek saath darshan ho jaataa hai.main umeed karta hoon kee yah pustak saahitya ke kshetra me apanaa mahatwapoorn sth
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May 15 at 10:39pm · Pawan Kumar-- Geeton ke Badal --mein Sabse Khoobsurat Geet...!! "Amaltash"...!! Kyaa Kyaa Roop dharhe hain..!! waah sir ji Waah..!! Speachless...!!
May 15 at 10:40pm · Neelam Anshu बादलों में, सागरों में ,सिर्फ तेरा ही उमड़ना , देखने की जिद हमें थी , डूबकर तुझमें उतरना ।
गीतों में निजता के बिम्ब गीत गुनगुनाने की जरूरत हमारे रोजमर्रा के जीवन को आनंद की अनुभूति से भर देती है /संगीत और शब्दों की मिठास के प्रति चाहत एक प्राकृतिक क्रिया है /'गीतों के बादल ' के गीत रूमानियत और निजी अंतरद्वंदों के मिले जुले भाव प्रस्तुत करते हैं /इन गीतों का रचनाकाल [१९७०-२००९]स्वयं गीतकार की रचना प्रक्रिया के बनने- सँवरने का प्रमाण देता है /शुरू से अंत तक इन गीतों के भाव एक -एक पग बदते हुए चलते हैं /कहना
geeton ke baadal
Smeeksha, Hindustan Times, New Delhi, 15th May 2011
प्रकाशित समीक्षा [गीतों के बादल] ' तुषार ' हिंदुस्तान दैनिक समाचार १५ मई ,नयी दिल्ली /
By: Tushar Devendrachaudhry
Manorma Mishra --main to dekhakar dang rah jati hun ki .jindagi ke har ahassas ko itni khoobsoorti se shabdo me kaise pirote hain aap...
मैं चाहता हूँ 'गीतों के बादल' एक ऐसे' प्रेमग्रन्थ 'के रूप में प्रतिष्ठित हो ,जो इसे पदे,उसे लगे ,वो प्रेम -सरिता में नहाकर निकला है/

सोमवार, 23 मई 2011

तुषार जी ,.....सादर ..नमस्ते ,आपकी कवितायें जीवन के ऊँचे -नीचे रास्तों पर शब्दों की ऊँगली थामे एक के बाद एक डग भरतीं हैं /शैशवावस्था से तरुणाई की ओर,और उसे और आगे बदातीं हैं ..लगता ही नहीं कि हम किसी कविता को पद रहे हैं /आपकी कवितायें, जीवन के हर पहलू को जीवंत करतीं हैं /हम यह तो कह नहीं सकते कि यह कविता ज्यादा अच्छी है या यह वाली ....हम चाहकर भी ... चार कवितायें छोड़ कर पद नहीं सकते ...सब एक के बाद एक क्र
Navin C. Chaturvedi

तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-



:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देत...ी है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|



:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|



आप कृपया मुझे अपनी बॅंक अकाउंट डीटेल दीजिए, मुझे इस पुस्तक की न्यौछावर जमा करनी है| यहाँ सवाल पैसों का नहीं, बल्कि एक सरस्वती पुत्र के सम्मान का है| यदि हम लोग ही एक दूसरे का सम्मान नहीं करेंगे तो पॉप संस्कृति के चौबारे पर ठुमके लगाती नस्ल से उम्मीद करना बेमानी होगा.............
तुषार जी !'गीतों के बादल' ने 'गीतों की बरसात' में भिगो दिया.जीवन में सुख दुःख सबके हिस्से आते और भोगे जाते हें.संवेदनशील मन में ऎसी एक-एक घटना अणु-विस्फोट सी फूटती है और कभी कभी कविता या लेखन में फूट बहती है.आपका प्रकरण अनूठा है -युवा-काल की दहलीज़ पर अनुज को खोने का दारुण दुख, फिर,उस वय के सहज प्राकृतिक आकर्षणों के मरहम, तदन्तर अत्यंत रागमय सहचरी के चन्दन जैसे अनुराग की गहराई और सौंदर्य में डूबते ही जाना,अकस्मात् , परम प्रिय पुत्री का अकाल ही चले जाना,एक पुत्री के विवाह से जुड़ी विषम अत्यंत त्रासक समस्याओं का सिलसिला,और, अंतत: सहचरी का दैहिक अवसान.यह सब आप के संवेदनशील अंतर में अनवरत अणु-विष्फोट की तरह फूट-फूट कर पीड़ा और प्रेम, संयोग और वियोग, लयपूर्ण अभिव्यक्ति और सटीक सार्थक शब्दों में भाव भरे घने मेघों की तरह घुमड़-घुमड़ कर झड़ी लगा कर बरसते ही चले गए हैं, बरसते ही जा रहे हैं. निश्चय ही जिस प्रकृति ने आपको इतना संवेदनशील बनाया है उसी ने आपको 'बिखरने' से बचाने की सहन शक्ति देने के लिए यह काव्य धारा भी प्रदान की है -"फूल उठा है अमलतास पर पीले फूलों के सहे ले.ऐसे ही क्या धीरे धीरे से,टूटा संबल, जुड़ जाता हैरह सकता जो योगी-सम, वहराज पुरुष भी बन सकता है."उपर्युक्त पंक्तियाँ लिखने के बाद भी आपके अन्दर-बाहर से बहुत कुछ रीत गया है , लेकिन निश्चय ही अब भी आपके अन्दर फूट रहे कविता के सोते कंठ-आपूरित पीड़ा को थोड़ा सा निसृत करेंगे. आपकी कविताएँ बहुत से पाठकों को भाएँगी, आनंद देंगी, सहारा देंगी. उनके हिस्से इतना ही आएगा. बार बार जिस पीड़ा को भोग कर आप अपनी कविता की एक एक पंक्ति का सृजन कर रहे हैं उसे भोगना 'आप की ही' नियति है, पाठक तो उसे अंशमात्र ही छू सकेंगे.विनम्र आदर और ढेर सी शुभ काम्नाओं सहित,--राकेश तिवारी
Tushar Devendrachaudhry Manorma Mishra tushaar ji.... sadar namaste.... apki kavitayen jeevan ke unche neeche raston per sabdon ki ungali thame, ek ke bad ek dag bharti hui, shaishvastha se tarudai ki or our usase hi age ki or badhati hain.lagta hi nahi ham kisi k...avita ko pad...ha rahe hain.. aapkii kavitaon jeevan ke har pahloo ko jeevant karti hain.. ham ye to kah hi nahi sakte ki ye kavita jada achchhi hai ya ye vali.ham cha kar bhi char kavitayen chhod kar nahi padh sakte... sab ek ke bad ek karamansaar vayavasthit hain...usi ka apna ananad hai.. bahut achchha likhate hain aap... shesh fir.......
“गीतों के बादल″ संघर्षो भरे प्रेम की गाथा"
श्रवण शुक्ल, लेखक पत्रकार हैं
श्रवण शुक्ल
हाल ही में एक प्रेममहाकाव्य पढ़ने के दौरान जिंदगी के गूढ़ रहस्यों के अनुभव को समझने की कोशिस किया, प्रेममहाकाव्य का नाम है …’गीतों के बादल′ (जोकि तुषार देवचौधरी द्वारा लिखित एवं संकलित है.) …प्रेमकाव्यग्रन्थ इसलिए क्योकि इस काव्यसंग्रह में जीवन भर के अनुभव और प्यार की तरुणाई से लबरेज शब्दों की मालाएं पिरोई गई है .. कहने के लिए यह कविता संग्रह है जोकि जीवन के अनुभवों पर केंद्रित . कवि की जिंदगी में होने वाले उथल-पुथल और संघर्ष को दर्शाती है . लेकिन मेरी नज़र में यह पूरी जिंदगी की गाथा होने के साथ प्यार के प्रतीक के रूप में अपने प्राणप्रिये को समर्पित सन्देश है . जिसको पढकर लोग अपने जीवन के अनुभव को महसूस करेंगे और एक-एक लाइन में होने वाले संघर्ष को जीना चाहेंगे ..कुछ लाइने पूरी जिंदगी को झकझोर देंगी ..जैसे.. बादलों में, सागरों में ,
सिर्फ तेरा ही उमड़ना ,देखने की जिद हमें थी ,डूबकर तुझमें उतरना
पूरे काव्य संग्रह में लिखी हर कविता में वो सब है जो साधारण कवि की कल्पना से अक्सर बाहर ही होता है .. जिंदगी भर के संघर्ष, प्यार,नफरत, और सहन शीलता की झलक है इसमें..
आप किताब की भूमिका पढेंगे तो आपको एकबारगी लगेगा कि यह किताब मात्र एकतरफा ही होगी जो कवि के जीवन को ही गौरवान्वित करने का प्रयत्न करेगी.. लेकिन आपको काव्य रचनाये पढते समय भूमिका को भूलना पड़ेगा.. क्योकि भूमिका में कवि ने अपने जीवन की उन घटनाओं का उल्लेख किया है जिसने हर हल , हर समय कवि के जीवन को झकझोर दिया है … यह किताब पढते वक्त आपको कवि के पूरे जीवन के अनुभव कि झलक मिलेगी …
खास बात यह है कि इस किताब को लिखने एवं सारी घटनाओं को कलमबद्ध करते – 2 , अपने नए सुख-दुःख- प्यार-नफरत को पिरोते हुए ३ दशक लंबा वक्त लगा है…
यह किताब इतनी बेहतरीन इसलिए बन पाई है क्योकि इसकी रचना करते समय बहुत ही धैर्य रखा गया है.. ३ दशकों के धैर्य को पिरोती हुई यह किताब आधुनिक रचनाओं की मौलिकता में श्रेष्ठ लगती है .. आज के कवियो की किताबें सिर्फ २-४ महीनों में ही लिखी जाती है इसीलिए वह प्रासंगिकता उनमे नहीं रह पाती जो इस किताब में है..कवितायें जीवन के ऊँचे -नीचे रास्तों पर शब्दों की ऊँगली थामे एक के बाद एक डग भरतीं नज़र आती है, पहले भाग ‘भीगे पथ पर’ की घटनाओं को ३ दशकों बाद आगे बढाती है…लगता ही नहीं कि हम किसी किताब की अगली कड़ी पढ़ रहे है .. ‘गीतों के बादल′ जीवन के हर पहलू को जीवंत करतीं हैं..
कैसे कैसे स्वरुप है प्यार के, प्यार भरे संघर्ष के.. जो जीवन के चरित्र को रोमांचित कर देती है .अभी तक मेरे द्वारा पढ़ी गई प्रेमकाव्यग्रंथों में से सर्वश्रेष्ठ)
मेरी नज़र में यह निर्विवाद रूप से बेहद उम्दा काव्यग्रंथ है.. हम यह नहीं कह सकते कि कौन सी कविता ज्यादा अच्छी है.. और पढ़ना शुरू करने के बाद चाहकर भी हम इससे दूर नहीं भाग सकते . क्योकि इन कविताओ में जीवन का रोमांच छिपा हुआ है. ,
मैंने इसे अपने ब्लॉग पर इसलिए भी लिखा है क्योकि मेरी नजर में जीवन के सुख-दुःख प्यार नफरत को कविताओं में माध्यम से जीवंत करने का इससे बेहतर नजरिया हो ही नहीं सकता.. आखिर इसीलिए तो माना जाता है कि “जीवन एक संघर्ष” है जिससे जीत हासिल करना और जीत हासिल करके भी न जीतना … सबकुछ सीखना पड़ता है ..