तुषार जी ,.....सादर ..नमस्ते ,आपकी कवितायें जीवन के ऊँचे -नीचे रास्तों पर शब्दों की ऊँगली थामे एक के बाद एक डग भरतीं हैं /शैशवावस्था से तरुणाई की ओर,और उसे और आगे बदातीं हैं ..लगता ही नहीं कि हम किसी कविता को पद रहे हैं /आपकी कवितायें, जीवन के हर पहलू को जीवंत करतीं हैं /हम यह तो कह नहीं सकते कि यह कविता ज्यादा अच्छी है या यह वाली ....हम चाहकर भी ... चार कवितायें छोड़ कर पद नहीं सकते ...सब एक के बाद एक क्र
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