सोमवार, 23 मई 2011

Navin C. Chaturvedi

तुषार भाई आप की पुस्तक 'गीतों के बादल' को पढ़ने के बाद दो बातें कहना चाहता हूँ:-



:- पहली तो ये कि मैं कंफ्यूज हूँ कि आप को गीतकार कहूँ या शायर| जहाँ एक ओर नदी की अविरल धारा की तरह बहती शब्द सरिता हिन्दी के करीब होने के कारण गीतों का आभास देत...ी है| वहीं दूसरी तरफ, मोर देन ९०% केसेस में आप की रचना बहर से बतियाती हुई एक अलग तरह से ही भले, पर शाइरी की मिसाल भी पेश करती है| खैर हम इसे पाठक माई बाप के ऊपर छोड़ देते हैं|



:- और दूसरी बात जो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ वो ये कि अगर किसी बंदे ने इस पुस्तक के किसी भी पन्ने को खोल कर कोई सी भी चार लाइन पढ़ लीं, तो खरीदे बिना नहीं रहेगा|



आप कृपया मुझे अपनी बॅंक अकाउंट डीटेल दीजिए, मुझे इस पुस्तक की न्यौछावर जमा करनी है| यहाँ सवाल पैसों का नहीं, बल्कि एक सरस्वती पुत्र के सम्मान का है| यदि हम लोग ही एक दूसरे का सम्मान नहीं करेंगे तो पॉप संस्कृति के चौबारे पर ठुमके लगाती नस्ल से उम्मीद करना बेमानी होगा.............

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