“गीतों के बादल″ ---संघर्षो भरे प्रेम की गाथा" --- ''तुषार देवेन्द्र चौधरी ''
श्रवण शुक्ल----
हाल ही में एक प्रेममहाकाव्य पढ़ने के दौरान जिंदगी के गूढ़ रहस्यों के अनुभव को समझने की कोशिस की इस प्रेममहाकाव्य का नाम है …’गीतों के बादल′ जोकि--- ''तुषार देवेन्द्र चौधरी ''द्वारा लिखित एवं संकलित है. … यह प्रेमकाव्यग्रन्थ इसलिए कहा जा सकता क्योंकि इस काव्यसंग्रह में जीवन भर के अनुभव और प्यार की तरुणाई से लबरेज शब्दों की मालाएं पिरोई गई है .. कहने के लिए यह कविता संग्रह है जोकि जीवन के अनुभवों पर केंद्रित . कवि की जिंदगी में होने वाली उथल-पुथल और संघर्ष को दर्शाता है . लेकिन मेरी नज़र में यह पूरी जिंदगी की गाथा होने के साथ प्यार के प्रतीक के रूप में अपने प्राणप्रिये को समर्पित सन्देश है . जिसको पढकर लोग अपने जीवन के अनुभव को महसूस करेंगे और एक-एक लाइन में होने वाले संघर्ष को जीना चाहेंगे ..कुछ लाइने पूरी जिंदगी को झकझोर देंगी जैसे .-----
. बादलों में, सागरों में ,सिर्फ तेरा ही उमड़ना ,
देखने की जिद हमें थी ,डूबकर तुझमें उतरना //
पूरे काव्य संग्रह में लिखी हर कविता में वो सब है जो एक साधारण कवि की कल्पना से अक्सर बाहर ही होता है .. जिंदगी भर के संघर्ष, प्यार,नफरत, और सहन शीलता की झलक इसमें..बिलकुल पारदर्शी - सी दिखाई देती है /
आप किताब की भूमिका पढेंगे तो आपको एकबारगी लगेगा कि यह किताब मात्र एकतरफा ही होगी जो कवि के जीवन को गौरवान्वित करने का प्रयत्न करेगी.. लेकिन आपको काव्य रचनायें पढते समय भूमिका को संग्रह से हटाना मुश्किल पड़ेगा.. क्योकि भूमिका में कवि ने अपने जीवन की उन घटनाओं का उल्लेख किया है जिसने हर हल , हर समय कवि के जीवन को झकझोर दिया है … यह किताब पढते वक्त आपको कवि के पूरे जीवन के अनुभव कि झलक दिखलाई पड़ेगी /खास बात यह है कि इस किताब को लिखने के काल एवं सारी घटनाओं को कलमबद्ध करते हुए कवि को अपने सुख-दुःख- प्यार-नफरत को पिरोते हुए तीन दशक लंबा वक्त लगा है…
यह किताब इतनी बेहतरीन इसलिए बन पाई है क्योकि इसकी रचना करते समय बहुत ही धैर्य रखा गया है.. तीन दशकों के धैर्य को पिरोती हुई यह किताब आधुनिक रचनाओं की द्रष्टि से अपनी मौलिकता में श्रेष्ठतम लगती है .. आज के कवियो की किताबें सिर्फ २-४ महीनों में ही लिखी जाती हैं इसीलिए वह प्रासंगिकता उनमे नहीं रह पाती जो इस किताब में है..कवितायें जीवन के ऊँचे -नीचे रास्तों पर शब्दों की ऊँगली थामे एक के बाद एक डग भरतीं नज़र आती है, पहला भाग ‘भीगे पथ पर’ की घटनाओं को तीन दशकों तक .... आगे बढाता है…लगता ही नहीं कि हम किसी किताब की अगली कड़ी पढ़ रहे है .. ‘गीतों के बादल′ जीवन के हर पहलू को जीवंत करतीं है ......
कैसे -कैसे स्वरुप हैं प्यार के, प्यार भरे संघर्ष के.. जो जीवन के चरित्र को रोमांचित कर देते हैं /.अभी तक मेरे द्वारा पढ़ी गई प्रेमकाव्यग्रंथों में से सर्वश्रेष्ठ पुस्तक है यह / मेरी नज़र में यह निर्विवाद रूप से बेहद उम्दा काव्यग्रंथ है.. हम यह नहीं कह सकते कि कौन सी कविता ज्यादा अच्छी है.. और पढ़ना शुरू करने के बाद चाहकर भी हम इससे दूर नहीं भाग सकते . क्योकि इन कविताओ में जीवन का रोमांच छिपा हुआ है. ,/
मैंने इसे अपने ब्लॉग पर इसलिए भी लिखा है क्योकि मेरी नजर में जीवन के सुख-दुःख प्यार नफरत को कविताओं में माध्यम से जीवंत करने का
इससे बेहतर नजरिया हो ही नहीं सकता.. आखिर इसीलिए तो माना जाता है कि “जीवन एक संघर्ष” है जिससे जीत हासिल करना और जीत हासिल करके
भी न जीतना … जीवन से ही सीखना पड़ता है ..
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