दूरदर्शन -----जीवन रुपी सागर में उल्लास और उदासी से जुड़ी अनेक घटनायें लहरों की तरह उमड़ती तो हैं
मगर मनपर उनकी छाप पत्थर पर पड़ी लकीरों की तरह होती है ऐसे ही गीतों का संग्रह है --गीतों के बादल /
हिंदुस्तान ----गीत गुनगुनाने की जरुरत हमारे रोजमर्रा के जीवन को आनंद की अनुभूति से भर देती है /
संगीत और शब्दों के mithas के प्रति चाहत एक प्राकृतिक क्रिया है ''गीतों के बादल ''के गीत रूमानियत
और निजी अंतर्द्वंदों के मिले-जुले भाव प्रस्तुत करते हैं /शुरू से अंत तक इन गीतों के भाव एक-एक पग आगे
बदाते हुए चलते हैं / गीतकार की पीड़ायें इन गीतों में पूरी तरह सजीव होकर उतरी हैं /
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