बुधवार, 10 अगस्त 2011

यह संग्रह ३९ वर्षों के वैवाहिक जीवन की न सिर्फ दास्तान है बल्कि प्रकृति और प्रेम का एक साश्वत अभिलेख है /जीवन की कशमकश किसके साथ नहीं गुजरती लेकिन उसमें
एक इतना ... अजस्र प्रेम- बंधन... चिरंतन- बंधन...मोहक -बंधन ... शायद ही कहीं देखने को मिले /'तुषार जी 'जीवन की अग्निरेखा का जिस साहस से सामना करते हैं ,जीवन की उलझनों को जिस द्रदता से सुलझाते हैं इसके बाबजूद भी निराशा को घिरने नहीं देते /जीवन को एक उत्सव की तरह जी लेना चाहते हैं /उनके शब्दों में ----
जिन्दगी है एक उत्सव ,झूम जाने के लिए है ,
तुम अगर कुछ साथ दो तो गुनगुनाने के लिए है /

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