कवि ने सिर्फ अविधा में भाव पिरोने का साहस किया है ,लक्षणा ,व्यंजना से परहेज /वो चाहता तो काव्य के शेष दो कारकों का इस्तेमाल कर सकता था मगर उसके भाव --
अनुभूति के इतने करीब हैं जहाँ और कुछ कहने को बचता ही नहीं /वो अपने अनुभाव -विभावों का बातावरण जैसे का तैसा उतार देना चाहता है/ 'प्रसाद ' के ' आँसू 'से भी
कहीं ज्यादा उसके आँसू प्रवाहवान हैं ----''तुमने ऐसी सजा सुनाई ,अभिलाषा आघात हो गई,
मेरे आँसू इतने बरसे ,बे मौसम बरसात हो गई''.....[.समीक्षा ]
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