शोक- संतप्त कवि अपनी प्राण बल्लभा की स्मृति में यह संग्रह समर्पित करते हुए जब आकाश में बादलों की घटायें देखता है ,धरती पर समुन्दर के पानी को देखता है ,
उसका द्रवित ह्र्दय रुक नहीं पाता /उसके शब्दों में प्रियतमा के प्रति जो उदगार हैं उसके हर गीत में प्रतिबिंबित होकर उसके साथ बिताये पलों को साकार कर देते हैं ----
''मेरा अंतर तुमसे बिम्बित ,इन बूँदों में झलक रहा है,
तुमको खोकर क्या -क्या खोया ,गम का सागर छलक रहा है,''....[.समीक्षा ]
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