यह सम्पूर्ण संग्रह ...श्रंगार और करुण रस का एक मधु कलश है/कहीं सौन्दर्य की प्यास तो कहीं विरह की आग /कहीं मिलन की मधु - यामिनी तो कहीं वियोग का अंधकार /
उससे भी कहीं ऊपर... एक अनंत मिलन ....या महामिलन का.... दिवा स्वप्न /....एक -एक गीत को ....जीवन चक्र से.. इस तरह जोड़ देता है जैसे एक अनवरत
जीवन संगीत --अपने स्वर में ,अपनी दिशा में , अपनी अनुगूंजें छोड़ता चला जा रहा हो/
..............[समीक्षा ]
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