Tushar Devendrachaudhry
कवि बिना कोई परवाह किये परम्परागत गीतिकाव्य -धारा पुष्ट करता हुआ ,
उसे नयी भव्यता देकर एक उत्कृष्ट काव्य- संग्रह हिंदी साहित्य को देने में न केवल सफल हुआ है ,
बल्कि एक भीनी- भीनी रसधारा से परिप्लावित कर अपने पाठकों में लोकप्रिय हो चुका है /
समीक्षाकार --- डा० जय शंकर शुक्ल' किरण 'ऍम .ऐ .ऍम .एड .पी .एच .डी .
शिक्षा विभाग ,दिल्ली सरकार [काव्य संग्रह गीतों के बादल ]तुषार'अयन प्रकाशन , नयी दिल्ली
March 31 at 5:27am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
संक्षेप में कवि ने अनुभूतियों के अनुभाव - विभाव का अमृत मंथन किया है /
वो अपनी मधुशाला को ,अपने गीतों को ,अपने जीवन से निचोड़ कर भरता है /
आज भाग-दौड़ से भरी जिन्दगी में ,हिंदी कविता अपनी दशा और दिशा निर्धारित
नहीं कर पा रही है /क्या लिखा जाये क्या नहीं ,तरह -तरह के शिल्प -विधा चल पड़े हैं /
यहाँ तक कि शब्दों का प्रयोग भी स्थिर नहीं है,...
March 31 at 5:03am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
देख लीजिये तुषार; क्या कह रहे हैं -----
क्या पता इस जिन्दगी के पार कोई जिन्दगी हो ,
जो विधाता से बड़ी हो, जो तुम्हीं से बस उगी हो ,
निराशायें हार जातीं हैं ,कवि जीत जाता है ....
March 31 at 2:52am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
उसकी लेखनी में प्रसाद की कसमसाहट ,महादेवी रहस्य पीड़ा भी
अगर झलकती है तो अपने विशिष्ट परिवेश को उदघोषित करके झलकती है /
वो पंत और निराला की तरह एक चित्र ही नहीं बनाता ,चित्र में घोर निराशा के
बाबजूद ,प्राणोंन्मेश भी कर देता है /
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