शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

उक्त दोनों मुक्तक इस कृति के आमुख माने जा सकते हैं /प्रथम में कवि
प्रीत की फुहार को ,धूप -छाँव से सने पलों को,झील की आभा में झाँक कर
अपनी भाव -प्रवंचनाओं को व्यक्त करता है /प्रियतमा के स्वच्छ निर्मल बिम्बों को
प्रकृति के शाश्वत फ्रेम में जड़ देता है /यह कृति का एक रंग है /दुसरे मुक्तक में
कवि महादेवी वर्मा की भाँति ---मैं नीर भरी दुख की बदली अथवा जय शंकर प्रसाद जी के ---आँसू ---
की तरह अपनी पीड़ा को एक गरल की तरह हँसते - हँसते पी जाना चाहता है /i
March 29 at 8:16pm ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
संग्रह की रचनाओं को इस करीने से सजाया व संवारा गया है ,कि एक लय -प्रवाह
अंत तक कहीं टूटता नहीं है ,कहीं बिखरता नहीं है अपितु कवि दिल -दिमाग पर छा
जाता है/उदाहरण के लिए ----
निमिष -निमिष नयनों में क्या है ,एक झील सी प्रीत तुम्हारी,
अंग -अंग पर खेल रही है ,धूप तुम्हारी छाँव हमारी ,
एवम
छुपे -छुपे ही रह जाते हैं ,अक्सर आँखों में कुछ आँसू ,
जीने वाले जी लेते हैं ,पी -पी कर ही अपने आँसू ,
March 29 at 7:43pm ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
कवि तुषार का दूसरा काव्य संग्रह ---गीतों के बादल ---अयन प्रकाशन ,नयी दिल्ली ,द्वारा प्रकाशित हुआ है /
सन १९६७ में, प्रथम काव्य संग्रह ----भीगे पथ पर ----के प्रकाशन के उपरांत यह दूसरा काव्य संग्रह पूरे ४३ वर्ष के बाद ,
पुस्तकाकार रूप में हमारे सम्मुख आ पाया है,/
March 29 at 4:19am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe

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