Tushar Devendrachaudhry
श्रंगार को रसराज कहा गया है, डा ० हरिवंश राय बच्चन के अनुसार कवि रूमानी- भावनाओं को
सहजता से अभिव्यक्त करने में सफल है ,इसमें कोई शक नहीं /गीतों के बादल---- में कवि के कुछ गीत
श्रंगार की इस रसमयता को तन्मयता से भर देने में सक्षम हैं------
जितनी रस की धारायें थीं ,उन्मीलित-सी परिप्लावित थीं,
दिशा -दिशा में आवाहन था , मंद हवायें आह्लादित थीं ,
एवम
तुम नहाकर चाँदनी में , केश अपने मत सुखाओ ,
रात ठिठकी सी हुई है , चाँद ठिठका -सा खड़ा है ,
March 30 at 3:59am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
कवि अपने जीवन की रिक्तता का भी आभास बड़ी सहजता से कराता है ,वो प्रकृति और
प्रियतमा में ऐसा साम्य स्थापित कर देता है कि उसकी अभिव्यक्ति बिम्बों को एकाकार
कर देती है /ऐसा अद्भुत समायोजन ....नदी के दो किनारों की तरह ,प्रीत के दो किनारे नहीं हो सकते ,यह
---तुषार-- जैसे कवि की सामर्थ्य का प्रमाण है /कवि अमूर्त प्रेम को मूर्त प्रेम में ,,,मूर्त प्रेम को अमूर्त प्रेम में ,
रेखांकित करता है या मन को ,कहाँ तक छूता हुआ निकल जाता है पता नहीं चलता /
March 30 at 2:36am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
प्रीत के दो - दो किनारे ,हो नहीं सकते यहाँ पर ,
एक तुम छूलो बहाँ पर, एक में छूलूं यहाँ पर ,
उक्त तीनों अन्तराएँ प्रेम की पराकाष्ठा को व्यक्त करने के लिए
एक अभिनव उद्यम हैं /कवि द्वारा प्रथम अंतरे में प्रकृति के सुन्दर प्रतीकों का प्रयोग ,प्यार
की खुशबु बिखेरने का ,बसंत के आगमन पर नव कोंपलों का आकार लेती प्रियतमा का ,मन प्राणों में
घुल जाने का द्रश्य देखते ही बनता है/
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