यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही
मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के
प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन ,
March 31 at 12:45am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
कवि शब्द चयन में मनोभावों को बाँधने में इतना सक्षम है कि शिल्पगत बिविधता के बिना भी
एक नया शिल्प रच देता है /उसकी शाब्दिक ध्वनि का निरूपण देखें ---
नयनों में सावन आता है ,नयनों में पतझड़ होता है ,
नयनों में प्रियतम बसता है, सपनों का मरमर होता है ,
March 30 at 9:53pm ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
तुषार--के आलोच्य संग्रह में शब्द अपने सर्जक के मनोभावों पर नृत्य करते हैं /
शिल्प ,सज्जा का ध्यान रखता है / कथन , एक मंच की तरह है /अलंकार व समास आवश्यक भाव भंगिमायें हैं /
और इनसे जो रस की निष्पत्ति होती है अभूतपूर्व माधुर्य में बदल जाती है /
March 30 at 8:35pm ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
को जैसे इस जगत की या वक्त की परिणति तक पहुँचा देती है /उसके अनुसार जगत का सार प्रेम है --
जब तुम्हें पाया जगत में ,कुछ बहारें आ गईं थीं ,अन्यथा सब निस्सार है /कवि अपने मिथ्या अहम् को
अपनी हार के रूप में स्वीकार करने से नहीं झिझकता मगर वो अपने प्रेम का बक्त के साथ टकराव भी स्वीकार करता है /
तुम लड़ो या मत लड़ो ,ये वक्त तो लड़ता रहेगा ,लेकिन वो अपने और अपने प्रेम के आस्तित्व को क्षणभंगुर मानने से इंकार कर देता है /
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