कवि जब निराशा के गहन -अंधकार में घिरता है ,उसकी स्याह चादर में अपने साथ
सब कुछ समेट लेना चाहता है .....
चाहे कितने अश्रु बहा लूँ ,तुम्हें न बापस ला पाऊंगा ,
चाहे कितना प्यार जता लूँ ,तुम्हें न फिर से पा पाऊंगा ,
वो एक ऐसे कथ्य में डूब जाता है ,जिसकी कल्पना जायसी ,घनानंद जैसे कवि भी
नहीं कर पाये /बिद्यापति के भावों में भी इतनी रहस्य बेदना शायद न होगी /
March 31 at 2:28am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
इस जगह पर कवि ने बड़ी चित्रकारी से नयनों को प्रकृति पर अबलंबित कर उसका विबेचन किया है /
तुषार; कविता को लिखते नहीं हैं वरन जीते हुए निकल जाते हैं /उनका यह जीना ,मरना कोई भी पाठक
या व्यक्ति झील सी गहरी आँखों में झाँक कर देखेगा तो खुद व खुद समझ आ जायेगा /कवि का अंदाजे बयाँ
एक साथ कितने जादू कर देता है ,देखते ही बनता है/
March 31 at 1:03am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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Tushar Devendrachaudhry
यहाँ मरमर शब्द हवा की ध्वनि का संकेत है जो कवि के द्वारा बहुत ही
मनोरम तरीके से प्रयोग किया गया है /इस तरह का प्रयोग ध्वनि शाष्त्र के
प्रवर्तक आचार्य आनंद बर्धन की कृति ध्वन्यालोक में निरुपित किया गया है/
तुषार का एक शब्द चित्र देखें ----कुछ चोर नयन ,कुछ मोर नयन ,कुछ खंजन और चकोर नयन ,
कुछ पीन नयन ,कुछ मीन नयन ,कुछ हिरनी से चित चोर नयन ,
March 31 at 12:45am ·LikeUnlike · ·UnsubscribeSubscribe
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