मंगलवार, 29 नवंबर 2011

Sanjay Kumar---क्या कहने आप के सर जी आपकी लेखनी जादू है , आप का जबाब नहीं मैं आप का एक अदना सा प्रसंसक हूँ /
Madhuri Rawat--- कल्पना लोक में ले जाते है आप --तुषार जी ....
आनंद पाण्डेय ----आश्चर्यजनक,हम तो समझे थे कि अश्कों की किश्तें चुक गईं ---पर रात इक तस्वीर ने फिर से तगाजा कर दिया /
Saurabh Pandey ---नमस्ते.. आप विस्मित कर देते हैं.. आपको मेरा नमन ....

Neeraj Tripathi-- awesum sir...laajwaab...shringaar ras se labalab
Dinesh Verma ........
आदरणीय , हमें नहीं पता था कि आपका जीवन अनेक झंझावतों से गुजर चुका है... हम इस बात से भी अनभिज्ञ थे कि आदरणीया आपसे दूर जा चुकी हैं.. इन परेशानियों के सागर में डूबते-उतराते आपने जो सृजित किया है.. वह अमूल्य है... मैंने ''गीतों के बादल से '' कुछ बूँदें पंदह मिनट में पायी हैं,, ये बूंदे मुझे स्वाति की तरह लगी.. अब आपकी यह कृति मेरे लिए धरोहर तो है ही... दिशा निर्देशन का कार्य भी करेगी.... आभारी हूँ आपका.. जो मुझे इस लायक समझा.......

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